कुरान - 26:210 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

210
وَمَا تَنَزَّلَتۡ بِهِ ٱلشَّيَٰطِينُ

Transliteration: (Wa maa tanazzalat bihish Shayaateen)

और इस (क़ुरआन) को शैतान लेकर नहीं उतरे [206]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 210 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 210

"और इस क़ुरआन को शैतान लेकर नहीं उतरे [206];"

[206] क़ुरआन की तहारत और शैतानी दख़ल की नफ़ी

मुशरिकों का यह झूठा इल्ज़ाम था कि गोया हुज़ूर ﷺ काहिन हैं और कोई शैतान आपके पास यह कलाम लाता है। अल्लाह तआला ने इसकी साफ़ नफ़ी फ़रमाई कि शैतान तो बुराई, झूठ और फ़ित्ने का मंबा हैं, उनका तौहीद, पाकीज़गी और इंसाफ़ से भरे इस कलाम से क्या वास्ता?

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