Transliteration: (Innahum 'anis sam'i lama'zooloon)
"बेशक वे सुनने से बिल्कुल दूर रखे गए हैं [208]।"
हुज़ूर अक़दस ﷺ की विलादत और बेअसत के वक़्त से आसमानों पर फ़रिश्तों और अंगारों (शहाब-ए-साक़िब) का ऐसा सख़्त पहरा लगा दिया गया है कि कोई जिन्नात या शैतान आसमान की तरफ़ चढ़ कर फ़रिश्तों की बात चुराने की हिम्मत नहीं कर सकता।
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