कुरान - 26:212 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

212
إِنَّهُمۡ عَنِ ٱلسَّمۡعِ لَمَعۡزُولُونَ

Transliteration: (Innahum 'anis sam'i lama'zooloon)

बेशक वे (आसमानी ख़बरें) सुनने से बिल्कुल दूर रखे गए हैं [208]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 212 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 212

"बेशक वे सुनने से बिल्कुल दूर रखे गए हैं [208]।"

[208] शहाब-ए-साक़िब का पहरा

हुज़ूर अक़दस ﷺ की विलादत और बेअसत के वक़्त से आसमानों पर फ़रिश्तों और अंगारों (शहाब-ए-साक़िब) का ऐसा सख़्त पहरा लगा दिया गया है कि कोई जिन्नात या शैतान आसमान की तरफ़ चढ़ कर फ़रिश्तों की बात चुराने की हिम्मत नहीं कर सकता।

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