कुरान - 26:211 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

211
وَمَا يَنۢبَغِي لَهُمۡ وَمَا يَسۡتَطِيعُونَ

Transliteration: (Wa maa yambaghee lahum wa maa yastatee'oon)

और न यह उनके लायक़ (शायान-ए-शान) है और न ही वे ऐसा कर सकते हैं [207]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 211 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 211

"और न यह उनके लायक़ है और न वे ऐसा कर सकते हैं [207];"

[207] शैतानों की आजिज़ी और बारगाह-ए-मुस्तफ़ा ﷺ का जलाल

शैतानों में न तो यह सलाहियत है कि वे ऐसा अज़ीम कलाम ला सकें और न ही वे बारगाह-ए-रिसालत के क़रीब फटकने की जुर्रत कर सकते हैं। जब हुज़ूर ﷺ के ग़ुलाम हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु को देखकर शैतान रास्ता बदल लेता है, तो भला सैय्यदुल मुर्सलीन ﷺ के दरबार में शैतान के दख़ल का क्या तसव्वुर हो सकता है!

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