Transliteration: (Wa maa yambaghee lahum wa maa yastatee'oon)
"और न यह उनके लायक़ है और न वे ऐसा कर सकते हैं [207];"
शैतानों में न तो यह सलाहियत है कि वे ऐसा अज़ीम कलाम ला सकें और न ही वे बारगाह-ए-रिसालत के क़रीब फटकने की जुर्रत कर सकते हैं। जब हुज़ूर ﷺ के ग़ुलाम हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़ियल्लाहु अन्हु को देखकर शैतान रास्ता बदल लेता है, तो भला सैय्यदुल मुर्सलीन ﷺ के दरबार में शैतान के दख़ल का क्या तसव्वुर हो सकता है!
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