कुरान - 26:213 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

213
فَلَا تَدۡعُ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ فَتَكُونَ مِنَ ٱلۡمُعَذَّبِينَ

Transliteration: (Falaa tad'u ma'al laahi ilaahan aakhara fatakoona minal mu'azzabeen)

पस तुम अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को न पुकारो [209], वरना तुम भी अज़ाब दिए जाने वालों में से हो जाओगे [210]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 213 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 213

"पस तुम अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को न पुकारो [209], वरना तुम भी अज़ाब दिए जाने वालों में से हो जाओगे [210]।"

[209] ख़ालिस तौहीद की ताकीद

यहाँ ख़िताब ज़ाहिरी तौर पर हुज़ूर ﷺ से है मगर सुनाना पूरी उम्मत को मक़सूद है कि अल्लाह की ज़ात व सिफ़ात और इबादत में किसी को शरीक न ठहराया जाए।

[210] शिर्क की सज़ा से ख़बरदार करना

शिर्क ज़ुल्म-ए-अज़ीम है जिसकी कोई माफ़ी नहीं। जो शिर्क करेगा वह यक़ीनन जहन्नम के दर्दनाक अज़ाब में हमेशा रहेगा।

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