Transliteration: (Falaa tad'u ma'al laahi ilaahan aakhara fatakoona minal mu'azzabeen)
"पस तुम अल्लाह के साथ किसी दूसरे माबूद को न पुकारो [209], वरना तुम भी अज़ाब दिए जाने वालों में से हो जाओगे [210]।"
यहाँ ख़िताब ज़ाहिरी तौर पर हुज़ूर ﷺ से है मगर सुनाना पूरी उम्मत को मक़सूद है कि अल्लाह की ज़ात व सिफ़ात और इबादत में किसी को शरीक न ठहराया जाए।
शिर्क ज़ुल्म-ए-अज़ीम है जिसकी कोई माफ़ी नहीं। जो शिर्क करेगा वह यक़ीनन जहन्नम के दर्दनाक अज़ाब में हमेशा रहेगा।
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