कुरान - 26:209 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

209
ذِكۡرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَٰلِمِينَ

Transliteration: (Zikraa wa maa kunnaa zaalimeen)

नसीहत के तौर पर; और हम ज़ुल्म करने वाले नहीं हैं [205]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 209 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 209

"नसीहत के तौर पर; और हम ज़ुल्म करने वाले नहीं हैं [205]।"

[205] अल्लाह का कमाल-ए-अद्ल और वालिदैन-ए-मुस्तफ़ा ﷺ का ईमान

इस आयत से दो अज़ीम क़ायदे साबित होते हैं:

  1. अल्लाह तआला किसी बेगुनाह को बग़ैर दावत व तबलीग़ के अज़ाब नहीं देता। अज़ाब सिर्फ़ उन पर आता है जो रसूलों को झुठलाते हैं।
  2. ज़माना-ए-फ़तरत के वे लोग जिन तक किसी नबी की दावत नहीं पहुंची और वे सिर्फ़ अक़्ल व फ़ितरत के मुताबिक़ एक ख़ुदा पर ईमान रखते थे, वे सब नजात याफ़्ता हैं। इसी उसूल पर अहले सुन्नत व जमाअत का अक़ीदा है कि हुज़ूर अक़दस ﷺ के वालिदैन करीमैन (हज़रत अब्दुल्लाह व हज़रत आमिना रज़ियल्लाहु अन्हुमा) सच्चे मोमिन, मुवह्हिद और अहले-जन्नत में से हैं। वे अल्लाह के नूर-ए-मुहम्मदी के अमीन थे और अल्लाह ने उन्हें शिर्क की नापाकी से पूरी तरह पाक व महफ़ूज़ रखा।

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