कुरान - 26:5 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
وَمَا يَأۡتِيهِم مِّن ذِكۡرٖ مِّنَ ٱلرَّحۡمَٰنِ مُحۡدَثٍ إِلَّا كَانُواْ عَنۡهُ مُعۡرِضِينَ

Transliteration: (Wa maa yaateehim min zikrim minar Rahmaani muhdasin illaa kaanoo 'anhu mu'rideen)

और उनके पास रहमान की तरफ़ से जब भी कोई नई नसीहत आती है, तो वे उससे मुंह ही फेर लेते हैं [5]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 5

"और जब भी रहमान की तरफ़ से कोई नई नसीहत आती है, तो वे मुंह फेर लेते हैं [5];"

[5] क़ुरआनी आयात से काफ़िरों का लगातार एअराज़ (मुंह फेरना)

जब भी अल्लाह रहमान की तरफ़ से क़ुरआन की कोई नई सूरह या आयत नाज़िल होती है जिसमें बन्दों की भलाई और रहमत का ज़िक्र होता है, तो ये मुशरिकीन नसीहत लेने और शुक्र करने के बजाय अपनी ज़िद और तकब्बुर से उससे मुंह फेर लेते हैं।

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