कुरान - 26:7 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ إِلَى ٱلۡأَرۡضِ كَمۡ أَنۢبَتۡنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوۡجٖ كَرِيمٍ

Transliteration: (Awa lam yaraw ilal ardi kam ambatnaa feehaa min kulli zawjin kareem)

क्या उन्होंने ज़मीन की तरफ़ नहीं देखा कि हमने उसमें हर तरह की उम्दा व नफ़ीस नबातात के कितने जोड़े उगाए हैं [7]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 7

"क्या उन्होंने ज़मीन को नहीं देखा कि हमने उसमें उम्दा नबातात के कितने जोड़े उगाए [7]?"

[7] ज़मीन की नबातात में क़ुदरत-ए-इलाही के नज़ारे

अल्लाह तआला ने मुर्दा और सूखी ज़मीन से फल, फूल, सब्ज़ियां, अनाज और मुतअद्दिद नफ़ा-बख़्श जड़ी-बूटियों के उम्दा और नफ़ीस जोड़े (नर व मादा) पैदा फ़रमाए। जो रब्बे-करीम बेजान मिट्टी और पानी से इतने हसीन पौधे उगा सकता है, वह मुर्दा इंसानों को क़ब्रों से दोबारा ज़िन्दा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

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