Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)
"बेशक इसमें बड़ी निशानी है [9], मगर उनमें से अक्सर ईमान लाने वाले नहीं [10]।"
ज़मीन से सब्ज़ा और पेड़-पौधों का उगना अल्लाह की वहदानियत और क़ियामत के दिन दोबारा उठाए जाने की रौशन निशानी है।
हज़ारों निशानियाँ देखने के बावजूद अक्सर लोग अपनी अंधी तक़लीद, दुनियावी लालच और तकब्बुर की वजह से ईमान नहीं लाते। हिदायत सिर्फ़ उन्हीं को मिलती है जो हक़ की तलाश में दिल के दरवाज़े खुले रखते हैं।
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