कुरान - 26:8 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)

बेशक इसमें (अल्लाह की कु़दरत की) बड़ी निशानी है [9], मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं हैं [10]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 8

"बेशक इसमें बड़ी निशानी है [9], मगर उनमें से अक्सर ईमान लाने वाले नहीं [10]।"

[9] तौहीद और क़ियामत की वाज़ेह दलील

ज़मीन से सब्ज़ा और पेड़-पौधों का उगना अल्लाह की वहदानियत और क़ियामत के दिन दोबारा उठाए जाने की रौशन निशानी है।

[10] अक्सर इंसानों की बदबख़्ती और बे-ईमानी

हज़ारों निशानियाँ देखने के बावजूद अक्सर लोग अपनी अंधी तक़लीद, दुनियावी लालच और तकब्बुर की वजह से ईमान नहीं लाते। हिदायत सिर्फ़ उन्हीं को मिलती है जो हक़ की तलाश में दिल के दरवाज़े खुले रखते हैं।

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