Transliteration: (La'allaka baakhi'un nafsaka allaa yakoonoo mu'mineen)
"(ऐ नबी!) शायद आप इस ग़म में अपनी जान घुला देंगे कि ये लोग ईमान नहीं लाते [3]!"
हुज़ूर अक़दस ﷺ अपनी उम्मत के लिए बेपनाह रहम व करम रखने वाले हैं। जब कुफ़्फ़ार-ए-मक्का कुफ़्र पर अड़े रहते और अपनी हलाकत का सामान करते, तो हुज़ूर ﷺ को उनके अंजाम का इतना शदीद ग़म और सदमा होता कि गोया आप अपनी जान-ए-मुक़द्दस को घुला देंगे। अल्लाह तआला ने अपने हबीब को तसल्ली देते हुए फ़रमाया कि ऐ महबूब! आप इन बदबख़्तों के ग़म में अपने आप को मशक़्क़त में न डालें, आपका काम सिर्फ़ हक़ पहुंचाना है।
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