Transliteration: (In nashaa nunazzil 'alaihim minas samaaa'i Aayatan fazallat a'naaquhum lahaa khaadi'een)
"अगर हम चाहें तो आसमान से ऐसी निशानी उतार दें कि उनकी गर्दनें झुक कर रह जाएं [4]।"
अल्लाह तआला इस पर पूरी तरह क़ादिर है कि आसमान से ऐसा ख़ौफ़नाक मोजिज़ा या अज़ाब की निशानी नाज़िल फ़रमा दे कि तमाम मुनकिरीन और सरकशों की गर्दनें आजिज़ी के साथ झुक जाएं और वे बेबस होकर कलिमा पढ़ लें। लेकिन अल्लाह की हिकमत का तकाज़ा यह है कि बन्दे अपनी समझ, अक़्ल और आज़ाद इरादे से ईमान लाएं, न कि मजबूरी और ज़बरदस्ती से।
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