Transliteration: (Wa makh-talaftum feehi min shai'in fahukmuhooo ilallaah; zaalikumul laahu Rabbee 'alaihi tawakkaltu wa ilaihi uneeb)
और जिस बात में à¤à¥€ तà¥à¤® इख़à¥à¤¤à¤¿à¤²à¤¾à¤«à¤¼ करो, तो उसका फ़ैसला अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ ही के हवाले है [20]; यही अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ मेरा रब है [21], उसी पर मैंने à¤à¤°à¥‹à¤¸à¤¾ किया और उसी की तरफ़ मैं रà¥à¤œà¥‚अ करता हूं [22]!
हक़ और बातिल, ईमान और कà¥à¤«à¤¼à¥à¤° का अमली और क़तई फ़ैसला अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला क़यामत के दिन फ़रमाà¤à¤—ा—मोमिनीन को जनà¥à¤¨à¤¤ अता फ़रमा कर और काफ़िरों को जहनà¥à¤¨à¤® में दाखिल कर के।
उलमा का तवकà¥à¤•à¥à¤² असबाब को इख़à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤° करने के बाद अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ पर à¤à¤°à¥‹à¤¸à¤¾ करना है, जबकि सूफ़ी-à¤-किराम का तवकà¥à¤•à¥à¤² असबाब से नज़र हटा कर सिरà¥à¤«à¤¼ मà¥à¤¸à¤¬à¥à¤¬à¤¿à¤¬à¥à¤² असबाब पर नज़र रखना है। हà¥à¤œà¤¼à¥‚र सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® ने अपनी हयात-à¤-तैयबा में इन दोनों मक़ामात का कामिल नमूना पेश फ़रमाया।
बंदा-à¤-मोमिन हर हाल में अपने रब पर तवकà¥à¤•à¥à¤² करता है और हर मामले में उसी की तरफ़ रà¥à¤œà¥‚अ करता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जो कà¥à¤› मिलता है वह उसी के फ़ज़à¥à¤² से मिलता है।
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