कुरान - 42:12 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
لَهُۥ مَقَالِيدُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقۡدِرُۚ إِنَّهُۥ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ

Transliteration: (Lahoo maqaaleedus samaawaati wal ardi yabsutur rizqa limai yashaaa'u wa yaqdir; innahoo bikulli shai'in 'Aleem)

उसी के पास आसमानों और ज़मीन की कुंजियां हैं [26]; वह जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा फ़रमाता है और जिसके लिए चाहता है तंग कर देता है [27]; बेशक वह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है [28]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 12

उसी के पास आसमानों और ज़मीन की कुंजियां हैं [26]; वह जिसके लिए चाहता है रिज़्क़ कुशादा फ़रमाता है और जिसके लिए चाहता है तंग कर देता है [27]; बेशक वह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है [28]।

[26] आसमान व ज़मीन के ख़ज़ानों की कुंजियां

अल्लाह तआला ही आसमानों और ज़मीन के ख़ज़ानों का हक़ीक़ी मालिक है। हदीस शरीफ़ में हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया: 'मुझे ज़मीन के ख़ज़ानों की कुंजियां अता फ़रमाई गईं।' अल्लाह तआला मालिक-ए-हक़ीक़ी है और हुज़ूर ﷺ उसके अता कर्दा क़ासिम (बांटने वाले) हैं।

[27] रिज़्क़ की कुशादगी और तंगी हिकमत-ए-इलाही के ताबे

रिज़्क़ का कम या ज़्यादा होना सिर्फ़ इंसान की मेहनत पर मौक़ूफ़ नहीं बल्कि अल्लाह की हिकमत व मर्जी पर है। वह किसी अनपढ़ को अमीर बना देता है और किसी अक़्लमंद को ग़रीब रखता है ताकि साबित हो कि रिज़्क़ अल्लाह का फ़ज़्ल है।

[28] अलीम की हिकमत

वह जानता है कि किस बंदे के हक़ में अमीरी बेहतर है और किसके हक़ में ग़रीबी, लिहाज़ा बंदे को शिकवे के बजाए शुक्र और सब्र करना चाहिए।

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