कुरान - 42:53 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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صِرَٰطِ ٱللَّهِ ٱلَّذِي لَهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ أَلَآ إِلَى ٱللَّهِ تَصِيرُ ٱلۡأُمُورُ

Transliteration: (Siraatil laahil lazee lahoo maa fis samaawaati wa maa fil ard; alaaa ilal laahi taseerul umoor (section 5))

उस अल्लाह के रास्ते की तरफ़, जिसका है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है; ख़बरदार! सारे ही मामलात अल्लाह ही की तरफ़ लौटते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 53

उस अल्लाह के रास्ते की तरफ़, जिसका है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है; ख़बरदार! सारे ही मामलात अल्लाह ही की तरफ़ लौटते हैं।

सिराते मुस्तक़ीम और रुजूअ इलाल्लाह

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जिस रास्ते की दावत देते हैं वह ज़ात-ए-बारी तआला का पसंदीदा रास्ता है जो आसमान व ज़मीन का ख़ालिक़ व मालिक है।

आख़िर में फ़रमाया गया: 'अला इलल्लाहि तसीरुल उमूर' यानी तमाम मामलात, आमाल, फ़ैसले और पूरी कायनात का अंजाम सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह ही की तरफ़ रुजूअ होने वाला है। जो इस रास्ते पर चला वह जन्नत की शादमानी पाएगा और जो भटका वह हलाकत में पड़ेगा।

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