कुरान - 42:50 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
أَوۡ يُزَوِّجُهُمۡ ذُكۡرَانٗا وَإِنَٰثٗاۖ وَيَجۡعَلُ مَن يَشَآءُ عَقِيمًاۚ إِنَّهُۥ عَلِيمٞ قَدِيرٞ

Transliteration: (Aw yuzawwijuhum zukraananw wa inaasanw wa yaj'alu mai yashaaa'u 'aqeemaa; innahoo 'Aleemun Qadeer)

या उन्हें बेटे और बेटियां दोनों मिलाकर अता फ़रमाता है [144], और जिसे चाहता है बे-औलाद (बांझ) कर देता है [145]; बेशक वह सब कुछ जानने वाला, बड़ी क़ुदरत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 50

या उन्हें बेटे और बेटियां दोनों मिलाकर अता फ़रमाता है [144], और जिसे चाहता है बे-औलाद (बांझ) कर देता है [145]; बेशक वह सब कुछ जानने वाला, बड़ी क़ुदरत वाला है।

[144] बेटे और बेटियां दोनों की नेअमत

अल्लाह तआला जिसे चाहता है बेटे और बेटियां दोनों अता फ़रमाता है, जैसे हुज़ूर सैयदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को बेटे (हज़रत क़ासिम, अब्दुल्लाह, इब्राहीम) और चार बेटियां (हज़रत ज़ैनब, रुक़य्या, उम्मे कुलसूम, फ़ातिमा ज़हरा रज़ियल्लाहु अन्हुम) अता फ़रमाईं।

[145] हिकमत के तहत बे-औलाद रखना

और जिसे चाहता है अपनी हिकमत से बे-औलाद रखता है, जैसे हज़रत यहया और हज़रत ईसा अलैहिमुस्सलाम। हर हाल में अल्लाह की रज़ा पर राज़ी रहना चाहिए।

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