कुरान - 42:52 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
وَكَذَٰلِكَ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ رُوحٗا مِّنۡ أَمۡرِنَاۚ مَا كُنتَ تَدۡرِي مَا ٱلۡكِتَٰبُ وَلَا ٱلۡإِيمَٰنُ وَلَٰكِن جَعَلۡنَٰهُ نُورٗا نَّهۡدِي بِهِۦ مَن نَّشَآءُ مِنۡ عِبَادِنَاۚ وَإِنَّكَ لَتَهۡدِيٓ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

Transliteration: (Wa kazaalika awhainaaa ilaika roohan min amrinaa; maa kunta tadree mal Kitaabu wa lal eemaanu wa laakin ja'alnaahu nooran nahdee bihee man nashaaa'u min 'ibaadinaa; wa innaka latahdeee ilaaa Siraatin Mustaqeem)

और इसी तरह हमने अपने हुक्म से एक रूह (क़ुरआन) को आपकी तरफ़ वही फ़रमाया [152] [153]; आप न जानते थे कि किताब क्या है और न यह कि शरीअत के तफ़्सीली अहकाम क्या हैं [154], लेकिन हमने इसे एक ऐसा नूर बनाया जिसके ज़रिए हम अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं हिदायत अता फ़रमाते हैं [155]; और बेशक आप यक़ीनन सीधे रास्ते (सिराते मुस्तक़ीम) की रहनुमाई फ़रमाते हैं [156]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 52

और इसी तरह हमने अपने हुक्म से एक रूह (क़ुरआन) को आपकी तरफ़ वही फ़रमाया [152] [153]; आप न जानते थे कि किताब क्या है और न यह कि शरीअत के तफ़्सीली अहकाम क्या हैं [154], लेकिन हमने इसे एक ऐसा नूर बनाया जिसके ज़रिए हम अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं हिदायत अता फ़रमाते हैं [155]; और बेशक आप यक़ीनन सीधे रास्ते (सिराते मुस्तक़ीम) की रहनुमाई फ़रमाते हैं [156];

[152] ख़त्म-ए-नबुव्वत का इशारा

जिस तरह पिछले नबियों पर वही भेजी गई, उसी तरह आप पर वही की गई; इसके बाद किसी नबी का ज़िक्र नहीं क्योंकि आप ख़ातमुन्नबिय्यीन हैं।

[153] क़ुरआन 'रूह' है

क़ुरआन करीम को 'रूह' फ़रमाया गया क्योंकि जिस तरह जिस्म की ज़िंदगी रूह से है, उसी तरह दिलों और रूहों की हक़ीक़ी ज़िंदगी क़ुरआन से है।

[154] इल्म-ए-तफ़्सील और अहकाम-ए-शरीअत

नुज़ूल-ए-क़ुरआन से पहले हुज़ूर ﷺ अल्लाह के सच्चे इबादत गुज़ार और कामिल आरिफ़ थे। यहां नफ़ी तफ़्सीली शरई अहकाम (नमाज़ के औक़ात, रोज़े के कफ़्फ़ारे वग़ैरा) की है जो वही के बाद तफ़सील से अता किए गए। अंबिया कभी ईमान से ख़ाली नहीं होते।

[155] क़ुरआन सरापा नूर और हिदायत

क़ुरआन नूर है जिसके ज़रिए अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को सीधे रास्ते की तौफ़ीक़ बख़्शता है।

[156] हुज़ूर ﷺ का हादी व मुर्सिल होना

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पूरी इंसानियत को सिराते मुस्तक़ीम (सीधे रास्ते) की रहनुमाई फ़रमाने वाले सच्चे हादी हैं।

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