Transliteration: (Wa kazaalika awhainaaa ilaika roohan min amrinaa; maa kunta tadree mal Kitaabu wa lal eemaanu wa laakin ja'alnaahu nooran nahdee bihee man nashaaa'u min 'ibaadinaa; wa innaka latahdeee ilaaa Siraatin Mustaqeem)
और इसी तरह हमने अपने हà¥à¤•à¥à¤® से à¤à¤• रूह (क़à¥à¤°à¤†à¤¨) को आपकी तरफ़ वही फ़रमाया [152] [153]; आप न जानते थे कि किताब कà¥à¤¯à¤¾ है और न यह कि शरीअत के तफ़à¥à¤¸à¥€à¤²à¥€ अहकाम कà¥à¤¯à¤¾ हैं [154], लेकिन हमने इसे à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ नूर बनाया जिसके ज़रिठहम अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं हिदायत अता फ़रमाते हैं [155]; और बेशक आप यक़ीनन सीधे रासà¥à¤¤à¥‡ (सिराते मà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•़ीम) की रहनà¥à¤®à¤¾à¤ˆ फ़रमाते हैं [156];
जिस तरह पिछले नबियों पर वही à¤à¥‡à¤œà¥€ गई, उसी तरह आप पर वही की गई; इसके बाद किसी नबी का ज़िकà¥à¤° नहीं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आप ख़ातमà¥à¤¨à¥à¤¨à¤¬à¤¿à¤¯à¥à¤¯à¥€à¤¨ हैं।
क़à¥à¤°à¤†à¤¨ करीम को 'रूह' फ़रमाया गया कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जिस तरह जिसà¥à¤® की ज़िंदगी रूह से है, उसी तरह दिलों और रूहों की हक़ीक़ी ज़िंदगी क़à¥à¤°à¤†à¤¨ से है।
नà¥à¤œà¤¼à¥‚ल-à¤-क़à¥à¤°à¤†à¤¨ से पहले हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के सचà¥à¤šà¥‡ इबादत गà¥à¤œà¤¼à¤¾à¤° और कामिल आरिफ़ थे। यहां नफ़ी तफ़à¥à¤¸à¥€à¤²à¥€ शरई अहकाम (नमाज़ के औक़ात, रोज़े के कफ़à¥à¤«à¤¼à¤¾à¤°à¥‡ वग़ैरा) की है जो वही के बाद तफ़सील से अता किठगà¤à¥¤ अंबिया कà¤à¥€ ईमान से ख़ाली नहीं होते।
क़à¥à¤°à¤†à¤¨ नूर है जिसके ज़रिठअलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला अपने नेक बंदों को सीधे रासà¥à¤¤à¥‡ की तौफ़ीक़ बख़à¥à¤¶à¤¤à¤¾ है।
हà¥à¤œà¤¼à¥‚र सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® पूरी इंसानियत को सिराते मà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•़ीम (सीधे रासà¥à¤¤à¥‡) की रहनà¥à¤®à¤¾à¤ˆ फ़रमाने वाले सचà¥à¤šà¥‡ हादी हैं।
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