कुरान - 42:47 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
ٱسۡتَجِيبُواْ لِرَبِّكُم مِّن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَ يَوۡمٞ لَّا مَرَدَّ لَهُۥ مِنَ ٱللَّهِۚ مَا لَكُم مِّن مَّلۡجَإٖ يَوۡمَئِذٖ وَمَا لَكُم مِّن نَّكِيرٖ

Transliteration: (Istajeeboo li Rabbikum min qabli any yaatiya Yawmul laa maradda lahoo min Allah; maa lakum min malja' iny yawma'izinw wa maa lakum min nakeer)

अपने रब का हुक्म मान लो [130] इससे पहले कि वह दिन आ पहुंचे [131] जिसके टलने की अल्लाह की तरफ़ से कोई सूरत न होगी [132]; उस दिन तुम्हारे लिए न कोई पनाह की जगह होगी [133] और न ही तुम (अपने गुनाहों से) मुकर सकोगे [134]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 47

अपने रब का हुक्म मान लो [130] इससे पहले कि वह दिन आ पहुंचे [131] जिसके टलने की अल्लाह की तरफ़ से कोई सूरत न होगी [132]; उस दिन तुम्हारे लिए न कोई पनाह की जगह होगी [133] और न ही तुम (अपने गुनाहों से) मुकर सकोगे [134]!

[130] रब और रसूल की इताअत

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की इताअत ही दरअस्ल अल्लाह की इताअत है।

[131] यौम-ए-क़यामत की आमद

क़यामत का दिन अचानक आ पहुंचेगा।

[132] फ़ैसले का अटल वक़्त

जब वह दिन आएगा तो किसी को तौबा या आमाल की मोहल्लत नहीं मिलेगी। आज अमल का वक़्त है, कल जज़ा का वक़्त होगा।

[133] मुनकिरीन के लिए कोई पनाहगाह नहीं

काफ़िरों के लिए कोई पनाह नहीं होगी, जबकि मोमिनीन अर्श-ए-इलाही और हुज़ूर ﷺ के दामन-ए-शफ़ाअत में पनाह पाएंगे।

[134] आमाल-नामे और आज़ा की गवाही

किरामन कातिबीन के लिखे हुए आमाल-नामे और जिस्म के अंगों की गवाही के सामने कोई अपने गुनाहों से मुकर नहीं सकेगा।

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