कुरान - 42:49 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
لِّلَّهِ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ يَهَبُ لِمَن يَشَآءُ إِنَٰثٗا وَيَهَبُ لِمَن يَشَآءُ ٱلذُّكُورَ

Transliteration: (Lillaahi mulkus samaawaati wal ard; yakhluqu maa yashaaa'; yahabu limai yashaaa'u inaasanw wa yahabu limai yashaaa'uz zukoor)

अल्लाह ही के लिए आसमानों और ज़मीन की बादशाही है [142]; वह जो चाहता है पैदा फ़रमाता है; जिसे चाहता है (अपनी रहमत से) बेटियां अता फ़रमाता है और जिसे चाहता है बेटे अता फ़रमाता है [143]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 49

अल्लाह ही के लिए आसमानों और ज़मीन की बादशाही है [142]; वह जो चाहता है पैदा फ़रमाता है; जिसे चाहता है (अपनी रहमत से) बेटियां अता फ़रमाता है और जिसे चाहता है बेटे अता फ़रमाता है [143];

[142] हक़ीक़ी मुतलक़ हुकूमत

आसमान व ज़मीन की मुतलक़ सल्तनत अल्लाह ही के हाथ में है।

[143] औलाद अल्लाह का ख़ालिस अतिया है: बेटियों की फ़ज़ीलत

औलाद का मिलना महज़ अल्लाह का फ़ज़्ल है। यहां बेटियों का ज़िक्र पहले फ़रमा कर ज़माना-ए-जहालत की इस रस्म की तरदीद की गई जो बेटियों की पैदाइश को बुरा समझते थे। हदीस शरीफ़ में बेटियों की अच्छी परवरिश पर जन्नत और हुज़ूर ﷺ की क़ुर्बत की बशारत दी गई है। हज़रत शुऐब और हज़रत लूत अलैहिमुस्सलाम को सिर्फ़ बेटियां अता हुईं, हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को सिर्फ़ बेटे अता हुए।

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