Transliteration: (Fa-in a'radoo famaaa arsalnaaka 'alaihim hafeezan in 'alaika illal balaagh; wa innaaa izaaa azaqnal insaana minnaa rahmatan fariha bihaa wa in tusibhum saiyi'atun bimaa qaddamat aydeehim fa innal insaana kafoor)
फिर अगर वे मà¥à¤‚ह मोड़ें [135], तो हमने आपको उन पर कोई निगहबान बनाकर नहीं à¤à¥‡à¤œà¤¾ [136]; आप पर तो सिरà¥à¤«à¤¼ (पैग़ाम) पहà¥à¤‚चा देना ही लाज़िम है [137]; और बेशक जब हम इंसान को अपनी तरफ़ से रहमत का मज़ा चखाते हैं [138], तो वह उस पर इतराने लगता है [139]; और अगर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उनके ही हाथों की à¤à¥‡à¤œà¥€ हà¥à¤ˆ करतूतों की वजह से कोई तकलीफ़ पहà¥à¤‚चे [140], तो इंसान बड़ा ही ना-शà¥à¤•रा बन जाता है [141]!
काफ़िर हक़ बात सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ के बाद à¤à¥€ अपनी हठधरà¥à¤®à¥€ पर क़ाइम रहते हैं।
हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º पर उनके ज़बरदसà¥à¤¤à¥€ मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨ बनाने की ज़िमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ नहीं थी; आपका काम पैग़ाम पहà¥à¤‚चा देना था जो आपने ब-कमाल-ओ-तमाम अंजाम दिया।
ग़ाफ़िल इंसान नेअमत पाकर रब का शà¥à¤•à¥à¤° अदा करने के बजाठअपनी दौलत व इज़à¥à¤œà¤¼à¤¤ पर घमंड करने लगता है।
और जब अपने ही गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ की पादाश में कोई तकलीफ़ आती है, तो पिछली तमाम नेअमतों को à¤à¥‚ल कर रब का नाशà¥à¤•à¥à¤°à¤¾ बन जाता है।
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