कुरान - 42:46 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَمَا كَانَ لَهُم مِّنۡ أَوۡلِيَآءَ يَنصُرُونَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِۗ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن سَبِيلٍ

Transliteration: (Wa maa kaana lahum min awliyaaa'a yansuroonahum min doonil laah; wa mai yudlilil laahu famaa lahoo min sabeel)

और उनके कोई ऐसे मददगार न होंगे [127] जो अल्लाह के मुक़ाबले में उनकी मदद करें; और जिसे अल्लाह गुमराह छोड़ दे [128], तो उसके लिए (निजात का) कोई रास्ता नहीं [129]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 46

और उनके कोई ऐसे मददगार न होंगे [127] जो अल्लाह के मुक़ाबले में उनकी मदद करें; और जिसे अल्लाह गुमराह छोड़ दे [128], तो उसके लिए (निजात का) कोई रास्ता नहीं [129]!

[127] बातिल माबूदों और दोस्तों की बेबसी

दुनिया में जिन सरदारों और बुतों पर वे तकिया करते थे, क़यामत के दिन उनमें से कोई भी अल्लाह की पकड़ से उन्हें छुड़ाने नहीं आ सकेगा।

[128] [129] हिदायत से महरूमी और हलाकत

अपनी बदअमलियों की वजह से जब इंसान का दिल सियाह हो जाता है, तो उसे न दुनिया में नेकी की राह मिलती है और न आख़िरत में जन्नत का रास्ता।

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