कुरान - 42:45 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
وَتَرَىٰهُمۡ يُعۡرَضُونَ عَلَيۡهَا خَٰشِعِينَ مِنَ ٱلذُّلِّ يَنظُرُونَ مِن طَرۡفٍ خَفِيّٖۗ وَقَالَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّ ٱلۡخَٰسِرِينَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ وَأَهۡلِيهِمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ أَلَآ إِنَّ ٱلظَّـٰلِمِينَ فِي عَذَابٖ مُّقِيمٖ

Transliteration: (Wa taraahum yu'radoona 'alaihaa khaashi'eena minazzulli yanzuroona min tarfin khafiyy; wa qaalal lazeena aamanooo innal khaasireenal lazeena khasirooo anfusahum wa ahleehim Yawmal Qiyaamah; alaaa innaz zaalimeena fee 'azaabin muqeem)

और आप उन्हें देखेंगे कि वे उस (आग) के सामने पेश किए जाएंगे, ज़िल्लत के मारे झुके हुए, कनखियों से देख रहे होंगे [123]; और जो लोग ईमान लाए वे कहेंगे: बेशक हक़ीक़ी घाटे वाले वही हैं [124] जिन्होंने क़ियामत के दिन अपनी जानों को और अपने अहलो-अयाल को नुक़सान में डाल दिया [125]; ख़बरदार! बेशक ज़ालिम लोग दायमी अज़ाब में होंगे [126]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 45

और आप उन्हें देखेंगे कि वे उस (आग) के सामने पेश किए जाएंगे, ज़िल्लत के मारे झुके हुए, कनखियों से देख रहे होंगे [123]; और जो लोग ईमान लाए वे कहेंगे: बेशक हक़ीक़ी घाटे वाले वही हैं [124] जिन्होंने क़ियामत के दिन अपनी जानों को और अपने अहलो-अयाल को नुक़सान में डाल दिया [125]; ख़बरदार! बेशक ज़ालिम लोग दायमी अज़ाब में होंगे [126]!

[123] शर्मिंदगी और ख़ौफ़ से कनखियों से देखना

दोज़ख़ी आग की हैबत और अपनी ज़िल्लत के सबब पूरी आंख खोल कर नहीं देख सकेंगे, बल्कि सर झुकाए कनखियों (चोरी-छिपे) से दहकती आग को देखेंगे।

[124] [125] हक़ीक़ी घाटा और महरूमी

असली नुक़सान दुनियावी दौलत का खोना नहीं बल्कि आख़िरत में अपने नफ़्स और अहल-ओ-अयाल को दोज़ख़ के हवाले कर देना है।

[126] काफ़िरों के लिए दायमी अज़ाब

कुफ़्र पर मरने वालों के लिए जहन्नम की सज़ा हमेशा-हमेशा के लिए मुक़र्रर है।

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