कुरान - 42:44 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن وَلِيّٖ مِّنۢ بَعۡدِهِۦۗ وَتَرَى ٱلظَّـٰلِمِينَ لَمَّا رَأَوُاْ ٱلۡعَذَابَ يَقُولُونَ هَلۡ إِلَىٰ مَرَدّٖ مِّن سَبِيلٖ

Transliteration: (Wa mai yudli lillaahu famaa lahoo minw waliyyin min ba'dih; wa taraz zaalimeena lammaa ra awul 'azaaba yaqooloona hal ilaa maraddin min sabeel)

और जिसे अल्लाह गुमराह छोड़ दे, तो उसके बाद उसका कोई मददगार नहीं [120]; और आप ज़ालिमों को देखेंगे [121] जब वे अज़ाब को देखेंगे तो कहेंगे: क्या (दुनिया में) लौटने का भी कोई रास्ता है [122]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 44

और जिसे अल्लाह गुमराह छोड़ दे, तो उसके बाद उसका कोई मददगार नहीं [120]; और आप ज़ालिमों को देखेंगे [121] जब वे अज़ाब को देखेंगे तो कहेंगे: क्या (दुनिया में) लौटने का भी कोई रास्ता है [122]?

[120] गुमराहों की बे-यारो-मददगारी

जो शख़्स अपनी सरकशी की वजह से तौफ़ीक़-ए-इलाही खो बैठता है, उसे कोई हिदायत नहीं दे सकता। अहले ईमान के लिए अल्लाह और उसके रसूल मददगार हैं, जबकि काफ़िरों का कोई हामी नहीं।

[121] दोज़ख़ के मंज़र का मुशाहिदा

क़यामत के दिन मोमिनीन काफ़िरों की रुसवाई का मुशाहिदा करेंगे। हुज़ूर ﷺ ने शब-ए-मेअराज ही में जन्नत व दोज़ख़ के तमाम अहवाल मुलाहिज़ा फ़रमा लिए थे।

[122] दुनिया में वापसी की तमन्ना की नाकामी

अज़ाब देख कर मुशरिक़ीन गिड़गिड़ाएंगे कि हमें दुनिया में वापस भेज दिया जाए ताकि हम ईमान लाएं, मगर वह दारुल-जज़ा होगा जहां वापसी का कोई इमकान नहीं।

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