Transliteration: (Innamas sabeelu 'alal lazeena yazlimoonan naasa wa yabghoona fil ardi bighairil haqq; ulaaa'ika lahum 'azaabun aleem)
(इलà¥à¤œà¤¼à¤¾à¤® और सज़ा का) रासà¥à¤¤à¤¾ तो सिरà¥à¤«à¤¼ उन लोगों पर है जो लोगों पर ज़à¥à¤²à¥à¤® करते हैं [116] और ज़मीन में नाहक़ सरकशी फैलाते हैं [117]; यही लोग हैं जिनके लिठदरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• अज़ाब है।
गà¥à¤¨à¤¾à¤¹ और मà¥à¤†à¤–़ज़ा उन पर है जो बंदगान-à¤-ख़à¥à¤¦à¤¾ पर ज़à¥à¤²à¥à¤® करते हैं—ख़à¥à¤µà¤¾à¤¹ जानी हो, माली हो या इज़à¥à¤œà¤¼à¤¤ व आबरू का नà¥à¤•़सान हो। इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ शरीअत में हर जà¥à¤°à¥à¤® की मà¥à¤…यà¥à¤¯à¤¨ सज़ाà¤à¤‚ हैं (क़िसास, दियत, हद, ताज़ीर)।
ज़ाती ज़à¥à¤²à¥à¤® (जैसे गाली देना या मारना) में मà¥à¤†à¤«à¤¼ करना हà¥à¤¸à¥à¤¨à¥‡ अख़लाक़ है; लेकिन क़ौमी सरकशी और मà¥à¤²à¥à¤• व मिलà¥à¤²à¤¤ से बग़ावत में मà¥à¤†à¤«à¤¼ करना फ़साद को बढ़ावा देना है। बग़ावत करने वालों को दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• सज़ा दी जाà¤à¤—ी।
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