कुरान - 42:41 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
وَلَمَنِ ٱنتَصَرَ بَعۡدَ ظُلۡمِهِۦ فَأُوْلَـٰٓئِكَ مَا عَلَيۡهِم مِّن سَبِيلٍ

Transliteration: (Wa lamanin tasara ba'da zulmihee fa ulaaa'ika maa 'alaihim min sabeel)

और जिसने अपने मज़लूम होने के बाद बदला ले लिया, तो ऐसे लोगों पर (इल्ज़ाम का) कोई रास्ता नहीं है [115]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 41

और जिसने अपने मज़लूम होने के बाद बदला ले लिया, तो ऐसे लोगों पर (इल्ज़ाम का) कोई रास्ता नहीं है [115]।

[115] मज़लूम का बदला लेना बे-क़सूर है

अगर कोई मज़लूम शरई दायरे में रहकर अपने हक़ का मुतालबा करता है या ज़ालिम से बराबर का बदला लेता है, तो उस पर न दुनिया में कोई इल्ज़ाम है और न आख़िरत में कोई गुनाह। अलबत्ता क़ाज़ी और अदालत के ज़रिए क़ानूनी तरीक़ा इख़्तियार करना लाज़िम है।

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