कुरान - 42:39 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
وَٱلَّذِينَ إِذَآ أَصَابَهُمُ ٱلۡبَغۡيُ هُمۡ يَنتَصِرُونَ

Transliteration: (Wallazeena izaa asaabahumul baghyu hum yantasiroon)

और जो लोग, जब उन पर ज़ुल्म व ज़्यादती की जाए, तो वे (बराबरी के साथ) बदला लेते (बचाव करते) हैं [111]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 39

और जो लोग, जब उन पर ज़ुल्म व ज़्यादती की जाए, तो वे (बराबरी के साथ) बदला लेते (बचाव करते) हैं [111]।

[111] ज़ुल्म के मुक़ाबले में अपना दिफ़ा और इंतिक़ाम का जवाज़

पिछली आयतों में मुआफ़ करने की फ़ज़ीलत बयान हुई, और इस आयत में ज़ालिम से बराबर का बदला लेने और अपना दिफ़ा करने की इजाज़त दी गई। मुआफ़ करना अफ़ज़ल है, मगर ज़ालिम को रोकने और अमन क़ाइम करने के लिए शरई हुदूद के अंदर बराबरी का बदला लेना भी जायज़ है ताकि ज़ुल्म का रास्ता रोका जा सके।

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