Transliteration: (Wallazeenas tajaaboo li Rabbihim wa aqaamus Salaata wa amruhum shooraa bainahum wa mimmaa razaqnaahum yunfiqoon)
और जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने रब के हà¥à¤•à¥à¤® को क़बूल किया [108] और नमाज़ क़ायम की, और उनका निज़ाम आपस के मशवरे (शूरा) से चलता है [109], और जो कà¥à¤› हमने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रिज़à¥à¤•़ दिया है उसमें से ख़रà¥à¤š करते हैं [110];
यह आयत अंसार-à¤-मदीना के हक़ में नाज़िल हà¥à¤ˆ जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º की दावत पर लबà¥à¤¬à¥ˆà¤• कहा और जान व माल से इसà¥à¤²à¤¾à¤® की नà¥à¤¸à¤°à¤¤ की। रसूल की दावत को क़बूल करना अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की दावत को क़बूल करना है।
मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के इजà¥à¤¤à¤¿à¤®à¤¾à¤ˆ, सियासी और मà¥à¤†à¤¶à¤°à¤¤à¥€ मामलात (जैसे ख़िलाफ़त, जिहाद, इंतिज़ाम) बाहमी मशवरे से तय होते हैं। अलबतà¥à¤¤à¤¾ शरीअत के नसूस और क़तई अहकाम में मशवरे की गà¥à¤‚जाइश नहीं, वे हर हाल में लाज़िम हैं।
मोमिन अपने हलाल रिज़à¥à¤•़ में से ज़कात, सदà¥à¤•़ात और दीनी ख़िदमात में ख़रà¥à¤š करते हैं। सारा माल ख़रà¥à¤š करना आम लोगों पर फ़रà¥à¤œà¤¼ नहीं, थोड़ा ख़रà¥à¤š करना à¤à¥€ काफ़ी है; अलबतà¥à¤¤à¤¾ हज़रत सिदà¥à¤¦à¥€à¤•़-à¤-अकबर जैसी हसà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ सब कà¥à¤› क़à¥à¤°à¥à¤¬à¤¾à¤¨ करने का हौसला रखती हैं।
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