कुरान - 42:36 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
فَمَآ أُوتِيتُم مِّن شَيۡءٖ فَمَتَٰعُ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۚ وَمَا عِندَ ٱللَّهِ خَيۡرٞ وَأَبۡقَىٰ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَلَىٰ رَبِّهِمۡ يَتَوَكَّلُونَ

Transliteration: (Famaa ooteetum min shai'in famataa'ul hayaatid dunyaa wa maa 'indal laahi khairunw wa abqaa lillazeena aamanoo wa 'alaa Rabbihim yatawakkaloon)

पस तुम्हें जो कुछ भी दिया गया है [100], वह तो बस दुनियावी ज़िंदगी का थोड़ा सा (फ़ानी) सामान है [101]; और जो कुछ अल्लाह के पास है [102] वह कहीं बेहतर और हमेशा बाक़ी रहने वाला है [103], उन लोगों के लिए जो ईमान लाए और अपने रब पर भरोसा करते हैं [104]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 36

पस तुम्हें जो कुछ भी दिया गया है [100], वह तो बस दुनियावी ज़िंदगी का थोड़ा सा (फ़ानी) सामान है [101]; और जो कुछ अल्लाह के पास है [102] वह कहीं बेहतर और हमेशा बाक़ी रहने वाला है [103], उन लोगों के लिए जो ईमान लाए और अपने रब पर भरोसा करते हैं [104];

[100] दुनियावी माल अता-ए-इलाही है

दुनिया की दौलत सिर्फ़ अपनी मेहनत से नहीं बल्कि अल्लाह के अता करने से मिलती है।

[101] दुनियावी ज़िंदगी की बेसबाती

यह फ़ानी और आरज़ी साजो-सामान है जो मौत आते ही छूट जाता है। अक़्लमंद वह है जो फ़ानी पर बाक़ी को तरजीह दे।

[102] अल्लाह के पास का अज़ीम अज्र

अल्लाह के पास जो सवाब, नेअमतें और दीदार-ए-इलाही है, वह मोमिनों के लिए महफ़ूज़ है।

[103] आख़िरत की दो अज़ीम ख़ूबियां: ख़ैर व अबक़ा

आख़िरत की नेअमतें हर ऐब व ज़वाल से पाक हैं और कभी ख़त्म नहीं होंगी।

[104] हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु की अज़मत की दलील

हज़रत अली मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि यह आयत हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु के हक़ में नाज़िल हुई जब उन्होंने ग़ज़्वा-ए-तबूक के मौक़े पर अपना सारा माल अल्लाह की राह में क़ुर्बान कर दिया। क़ुरआन ने गवाही दी कि आप कामिल मोमिन और अज़ीम मुतवक्किल हैं।

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