Transliteration: (Famaa ooteetum min shai'in famataa'ul hayaatid dunyaa wa maa 'indal laahi khairunw wa abqaa lillazeena aamanoo wa 'alaa Rabbihim yatawakkaloon)
पस तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ जो कà¥à¤› à¤à¥€ दिया गया है [100], वह तो बस दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¥€ ज़िंदगी का थोड़ा सा (फ़ानी) सामान है [101]; और जो कà¥à¤› अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के पास है [102] वह कहीं बेहतर और हमेशा बाक़ी रहने वाला है [103], उन लोगों के लिठजो ईमान लाठऔर अपने रब पर à¤à¤°à¥‹à¤¸à¤¾ करते हैं [104];
दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की दौलत सिरà¥à¤«à¤¼ अपनी मेहनत से नहीं बलà¥à¤•ि अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के अता करने से मिलती है।
यह फ़ानी और आरज़ी साजो-सामान है जो मौत आते ही छूट जाता है। अक़à¥à¤²à¤®à¤‚द वह है जो फ़ानी पर बाक़ी को तरजीह दे।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के पास जो सवाब, नेअमतें और दीदार-à¤-इलाही है, वह मोमिनों के लिठमहफ़ूज़ है।
आख़िरत की नेअमतें हर à¤à¤¬ व ज़वाल से पाक हैं और कà¤à¥€ ख़तà¥à¤® नहीं होंगी।
हज़रत अली मà¥à¤°à¥à¤¤à¤œà¤¼à¤¾ रज़ियलà¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अनà¥à¤¹à¥ फ़रमाते हैं कि यह आयत हज़रत अबू बकà¥à¤° सिदà¥à¤¦à¥€à¤•़ रज़ियलà¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अनà¥à¤¹à¥ के हक़ में नाज़िल हà¥à¤ˆ जब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ग़ज़à¥à¤µà¤¾-à¤-तबूक के मौक़े पर अपना सारा माल अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की राह में क़à¥à¤°à¥à¤¬à¤¾à¤¨ कर दिया। क़à¥à¤°à¤†à¤¨ ने गवाही दी कि आप कामिल मोमिन और अज़ीम मà¥à¤¤à¤µà¤•à¥à¤•िल हैं।
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