कुरान - 42:35 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
وَيَعۡلَمَ ٱلَّذِينَ يُجَٰدِلُونَ فِيٓ ءَايَٰتِنَا مَا لَهُم مِّن مَّحِيصٖ

Transliteration: (Wa ya'lamal lazeena yujaadiloona feee Aayaatinaa maa lahum min mahees)

और ताकि वे लोग जो हमारी आयतों में झगड़ते हैं जान लें कि उनके लिए भागने (बचने) की कोई जगह नहीं है [99]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 35

और ताकि वे लोग जो हमारी आयतों में झगड़ते हैं जान लें कि उनके लिए भागने (बचने) की कोई जगह नहीं है [99]!

[99] अज़ाब-ए-इलाही से फ़रार नामुमकिन

जिस तरह समंदर में डूबते वक़्त इंसान अल्लाह के सिवा किसी से नजात नहीं पा सकता, उसी तरह क़यामत के दिन अहकाम-ए-इलाही के मुनकिरीन के लिए अज़ाब-ए-दोज़ख़ से भागने की कोई जगह न होगी। दुनिया की मुसीबतें आख़िरत के अज़ाब का नमूना हैं ताकि इंसान इब्रत हासिल करे।

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