कुरान - 42:33 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
إِن يَشَأۡ يُسۡكِنِ ٱلرِّيحَ فَيَظۡلَلۡنَ رَوَاكِدَ عَلَىٰ ظَهۡرِهِۦٓۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّكُلِّ صَبَّارٖ شَكُورٍ

Transliteration: (Iny yashaaa yuskinir reeha fa yazlalna rawaakida 'alaa zahrihi; inna fee zaalika la Aayaatil likulli sabbaarin shakoor)

अगर वह चाहे तो हवा को रोक दे, तो वे उसकी सतह पर ठहरे रह जाएं [96]; बेशक इसमें हर बड़े सब्र करने वाले, शुक्रगुज़ार के लिए बड़ी निशानियां हैं [97]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 33

अगर वह चाहे तो हवा को रोक दे, तो वे उसकी सतह पर ठहरे रह जाएं [96]; बेशक इसमें हर बड़े सब्र करने वाले, शुक्रगुज़ार के लिए बड़ी निशानियां हैं [97]।

[96] हवाओं पर अल्लाह का इख़्तियार

हवा अल्लाह के हुक्म की ताबेदार है। अगर अल्लाह तआला हवा को साकिन (ठहरा) दे, तो बादबानी जहाज़ समंदर के बीचों-बीच बेबस होकर खड़े रह जाएं और मुसाफ़िर भूख-प्यास से तड़प उठें।

[97] सब्र व शुक्र का मुक़ाम

सच्चा मोमिन मुसीबत और रुकावट पर सब्र करता है और नेअमत व सहूलत मिलने पर शुक्र अदा करता है। इन कुदरती मज़ाहिर में अहले बसीरत के लिए तौहीद की रौशन निशानियां हैं।

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