कुरान - 42:31 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
وَمَآ أَنتُم بِمُعۡجِزِينَ فِي ٱلۡأَرۡضِۖ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ

Transliteration: (Wa maaa antum bimu'jizeena fil ardi wa maa lakum min doonil laahi minw wa liyyinw wa laa naseer)

और तुम ज़मीन में (अल्लाह को) आजिज़ करने वाले नहीं हो [93]; और अल्लाह के सिवा न तुम्हारा कोई मददगार है और न कोई हिमायती [94]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 31

और तुम ज़मीन में (अल्लाह को) आजिज़ करने वाले नहीं हो [93]; और अल्लाह के सिवा न तुम्हारा कोई मददगार है और न कोई हिमायती [94]।

[93] क़ज़ा व क़द्र के आगे बेबसी

इंसान अल्लाह की सल्तनत और क़ुदरत से भाग कर कहीं पनाह नहीं ले सकता। जो मुसीबत या तफ़्सील तक़दीर में लिख दी गई है, उससे बचने का वाहिद रास्ता अल्लाह ही की तरफ़ रुजूअ करना और तौबा व तक़्वा इख़्तियार करना है।

[94] अल्लाह के इज़्न के बग़ैर कोई मददगार नहीं

अल्लाह की मर्जी के ख़िलाफ़ कोई किसी को नफ़ा या नुक़सान नहीं पहुंचा सकता। अलबत्ता अल्लाह के नेक बंदों और औलिया-ए-किराम की दुआओं से मुसीबतें टलती हैं क्योंकि वे अल्लाह के इज़्न और रज़ा से दुआ करते हैं।

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