कुरान - 42:29 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦ خَلۡقُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَثَّ فِيهِمَا مِن دَآبَّةٖۚ وَهُوَ عَلَىٰ جَمۡعِهِمۡ إِذَا يَشَآءُ قَدِيرٞ

Transliteration: (Wa min Aayaatihee khalqus samaawaati wal ardi wa maa bassa feehimaa min daaabbah; wa Huwa 'alaa jam'ihim izaa yashaaa'u Qadeer (section 3))

और उसकी निशानियों में से आसमानों और ज़मीन की पैदाइश है और वे जानदार जिन्हें उसने इन दोनों में फैला रखा है [89]; और वह जब चाहे उनके इकट्ठा करने पर पूरी तरह क़ादिर है [90]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 29

और उसकी निशानियों में से आसमानों और ज़मीन की पैदाइश है और वे जानदार जिन्हें उसने इन दोनों में फैला रखा है [89]; और वह जब चाहे उनके इकट्ठा करने पर पूरी तरह क़ादिर है [90]!

[89] मख़्लूक़ात का फैलाव और बिखरे हुए अजज़ा

अल्लाह तआला ने ज़मीन व आसमान में तरह-तरह के जानदार—इंसान, जिन्नात, परिंदे, चरंदे और फ़रिश्ते—बिखेर रखे हैं। मरने के बाद इंसान के जिस्मानी अज्ज़ा मिट्टी में मिल कर बिखर जाते हैं, मगर अल्लाह तआला के इल्म में हर ज़र्रा महफ़ूज़ है।

[90] हश्र के दिन ब-यक-वक़्त इकट्ठा करने पर क़ादिर

जिस रब ने पहली बार बिना किसी मिसाल के सबको पैदा किया, उसके लिए क़यामत के दिन एक ही आवाज़ पर तमाम मख़्लूक़ात के बिखरे हुए अज्ज़ा को जोड़ कर दोबारा ज़िंदा करना और मैदाने हश्र में इकट्ठा करना कोई मुश्किल नहीं।

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