कुरान - 42:28 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
وَهُوَ ٱلَّذِي يُنَزِّلُ ٱلۡغَيۡثَ مِنۢ بَعۡدِ مَا قَنَطُواْ وَيَنشُرُ رَحۡمَتَهُۥۚ وَهُوَ ٱلۡوَلِيُّ ٱلۡحَمِيدُ

Transliteration: (Wa Huwal lazee yunazzilul ghaisa min ba'di maa qanatoo wa yanshuru rahmatah; wa Huwal Waliyyul Hameed)

और वही है जो लोगों के ना-उम्मीद हो जाने के बाद बारिश बरसाता है [88] और अपनी रहमत को फैला देता है; और वही हक़ीक़ी कारसाज़, तमाम हम्द का मालिक (वली व हमीद) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 28

और वही है जो लोगों के ना-उम्मीद हो जाने के बाद बारिश बरसाता है [88] और अपनी रहमत को फैला देता है; और वही हक़ीक़ी कारसाज़, तमाम हम्द का मालिक (वली व हमीद) है।

[88] मायूसी के बाद नफ़ा-बख़्श रहमत की बारिश

यहां लफ़्ज़ 'ग़ैष' (الغَيْث) इस्तेमाल हुआ है जिससे मुराद वह मुफ़ीद और रहमत वाली बारिश है जो सूखे और क़हत के बाद बंदों की ज़िंदगी और फ़सलों के लिए हयात-ए-ताज़ा बन कर आए। जब इंसान तमाम ज़ाहिरी तदबीरों से मायूस हो जाता है, तो अल्लाह तआला अपनी मख़्सूस रहमत से अबर-ए-रहमत बरसा कर अपनी कुदरत का मुज़ाहिरा फ़रमाता है।

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