Transliteration: (Wa yastajeebul lazeena aamanoo wa 'amilu saalihaati wa yazeeduhum min fadlih; wal kaafiroona lahum 'azaabun shadeed)
और वह उन लोगों की दà¥à¤† क़बूल फ़रमाता है जो ईमान लाठऔर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने नेक आमाल किठ[83], और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने फ़ज़ल से और ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ अता फ़रमाता है [84]; और काफ़िरों के लिठसख़à¥à¤¤ अज़ाब है [85]!
जो लोग अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के अहकाम पर अमल करते हैं और तक़à¥à¤µà¤¾ इख़à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤° करते हैं, अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला उनकी दà¥à¤†à¤“ं को बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦ शरफ़-à¤-क़बूलियत बख़à¥à¤¶à¤¤à¤¾ है। दà¥à¤† की क़बूलियत के लिठहलाल लà¥à¤•़à¥à¤®à¤¾ और नेक अमल लाज़मी है।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला अपने नेक बंदों को उनकी मांगी हà¥à¤ˆ दà¥à¤† से à¤à¥€ बढ़कर अपने फ़ज़ल व à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¨ से नवाज़ता है।
काफ़िरों की दà¥à¤†à¤à¤‚ हक़ के ख़िलाफ़ होने की वजह से रदà¥à¤¦ कर दी जाती हैं और आख़िरत में उनके लिठसख़à¥à¤¤ तरीन अज़ाब तैयार है।
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