कुरान - 42:24 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
أَمۡ يَقُولُونَ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبٗاۖ فَإِن يَشَإِ ٱللَّهُ يَخۡتِمۡ عَلَىٰ قَلۡبِكَۗ وَيَمۡحُ ٱللَّهُ ٱلۡبَٰطِلَ وَيُحِقُّ ٱلۡحَقَّ بِكَلِمَٰتِهِۦٓۚ إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ

Transliteration: (Am yaqooloonaf tara 'alal laahi kaziban fa-iny yasha' illaahu yakhtim 'alaa qalbik; wa yamhul laahul baatila wa yuhiqqul haqqa bi Kalimaatih; innahoo 'Aleemun bizaatis sudoor)

क्या वे कहते हैं कि उसने अल्लाह पर झूठ बांध लिया है [77]? पस अगर अल्लाह चाहे तो आपके दिल पर मुहर लगा दे [78]; और अल्लाह बातिल को मिटाता है और अपने कलिमात (वही) के ज़रिए हक़ को साबित फ़रमाता है [79]; बेशक वह सीनों की छुपी बातों को ख़ूब जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 24

क्या वे कहते हैं कि उसने अल्लाह पर झूठ बांध लिया है [77]? पस अगर अल्लाह चाहे तो आपके दिल पर मुहर लगा दे [78]; और अल्लाह बातिल को मिटाता है और अपने कलिमात (वही) के ज़रिए हक़ को साबित फ़रमाता है [79]; बेशक वह सीनों की छुपी बातों को ख़ूब जानने वाला है।

[77] कुफ़्फ़ार का झूठा बोहतान

काफ़िरों ने क़ुरआन मजीद को हुज़ूर ﷺ का गढ़ा हुआ कलाम कह कर अल्लाह पर बोहतान लगाने का इल्ज़ाम लगाया।

[78] दिल-ए-मुबारका पर सब्र व सुकून की मुहर

मुहर लगाने से मुराद यह है कि अगर अल्लाह चाहता तो उनके तानों से आपके मुक़द्दस दिल को महफ़ूज़ रखने के लिए सब्र व सुकून की मुहर लगा देता ताकि उनकी बातों का कोई ग़म न पहुंचे। मगर अल्लाह की राह में नबी के दिल पर जो ग़म गुज़रता है वह भी इबादत और अज़ीम अज्र का सबब है।

[79] हक़ की फ़तह और बातिल का ख़ातमा

अल्लाह तआला ने अपने वादे के मुताबिक़ शिर्क व बातिल को मिटा दिया और हक़ का परचम दुनिया में हमेशा के लिए बुलंद फ़रमाया। आज भी हरमैन शरीफ़ैन शिर्क व बुतपरस्ती से पाक हैं।

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