Transliteration: (Zaalikal lazee yubash shirul laahu 'ibaadahul lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaat; qul laaa as'alukum 'alaihi ajran illal mawaddata fil qurbaa; wa mai yaqtarif hasanatan nazid lahoo feehaa husnaa; innal laaha Ghafoorun Shakoor)
यह वह (अज़ीम नेअमत) है जिसकी ख़à¥à¤¶à¤–़बरी अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ अपने उन बंदों को देता है जो ईमान लाठऔर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने नेक आमाल किठ[73]; आप फ़रमा दीजिà¤: मैं इस (तबà¥à¤²à¥€à¤—़) पर तà¥à¤®à¤¸à¥‡ अपनी क़राबतदारी (रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ व अहले बैत) की मà¥à¤¹à¤¬à¥à¤¬à¤¤ के सिवा कोई बदला नहीं मांगता [74] [75]; और जो कोई नेकी कमाà¤, हम उसके लिठउसमें और à¤à¤²à¤¾à¤ˆ बढ़ा देते हैं [76]; बेशक अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ बड़ा बख़à¥à¤¶à¤¨à¥‡ वाला, क़दà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ है।
ख़à¥à¤¶à¤–़बरी हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º सà¥à¤¨à¤¾ रहे हैं मगर अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ फ़रमाता है कि 'हम बशारत देते हैं'। इससे साबित हà¥à¤† कि रसूलà¥à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹ सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® की ज़बान-à¤-पाक से निकली हर बात अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का फ़रमान है।
जब अंसार-à¤-किराम ने हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º की ख़िदमत में माल पेश करना चाहा कि आपकी तंगदसà¥à¤¤à¥€ दूर हो, तो यह आयत नाज़िल हà¥à¤ˆ कि नबी को दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¥€ माल की हाजत नहीं। हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º ने उनका माल वापस फ़रमा दिया।
हज़रत अबà¥à¤¦à¥à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹ बिन अबà¥à¤¬à¤¾à¤¸ रज़ियलà¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अनà¥à¤¹à¥à¤®à¤¾ से मरवी है कि जब यह आयत नाज़िल हà¥à¤ˆ तो सहाबा ने अरà¥à¤œà¤¼ किया: 'या रसूललà¥à¤²à¤¾à¤¹! आपके वे क़राबतदार कौन हैं जिनकी मà¥à¤¹à¤¬à¥à¤¬à¤¤ हम पर फ़रà¥à¤œà¤¼ की गई?' हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º ने फ़रमाया: 'अली, फ़ातिमा और उनके दोनों बेटे (हसन व हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨)।' अहले बैत-à¤-किराम की मà¥à¤¹à¤¬à¥à¤¬à¤¤ ईमान का लाज़मी जà¥à¤œà¤¼ है।
तफ़सीर ख़ज़ाइनà¥à¤² इरफ़ान में है कि नेकी कमाने से मà¥à¤°à¤¾à¤¦ अहले बैत-à¤-अतहार से मà¥à¤¹à¤¬à¥à¤¬à¤¤ और उनकी ताज़ीम है। जो यह नेकी कमाता है, अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला उसके आमाल में नूर और दरà¥à¤œà¤¾à¤¤ में बेइंतिहा इज़ाफ़ा फ़रमाता है।
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