कुरान - 42:23 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
ذَٰلِكَ ٱلَّذِي يُبَشِّرُ ٱللَّهُ عِبَادَهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِۗ قُل لَّآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ أَجۡرًا إِلَّا ٱلۡمَوَدَّةَ فِي ٱلۡقُرۡبَىٰۗ وَمَن يَقۡتَرِفۡ حَسَنَةٗ نَّزِدۡ لَهُۥ فِيهَا حُسۡنًاۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ شَكُورٌ

Transliteration: (Zaalikal lazee yubash shirul laahu 'ibaadahul lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaat; qul laaa as'alukum 'alaihi ajran illal mawaddata fil qurbaa; wa mai yaqtarif hasanatan nazid lahoo feehaa husnaa; innal laaha Ghafoorun Shakoor)

यह वह (अज़ीम नेअमत) है जिसकी ख़ुशख़बरी अल्लाह अपने उन बंदों को देता है जो ईमान लाए और उन्होंने नेक आमाल किए [73]; आप फ़रमा दीजिए: मैं इस (तब्लीग़) पर तुमसे अपनी क़राबतदारी (रिश्तेदारी व अहले बैत) की मुहब्बत के सिवा कोई बदला नहीं मांगता [74] [75]; और जो कोई नेकी कमाए, हम उसके लिए उसमें और भलाई बढ़ा देते हैं [76]; बेशक अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, क़द्रदान है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 23

यह वह (अज़ीम नेअमत) है जिसकी ख़ुशख़बरी अल्लाह अपने उन बंदों को देता है जो ईमान लाए और उन्होंने नेक आमाल किए [73]; आप फ़रमा दीजिए: मैं इस (तब्लीग़) पर तुमसे अपनी क़राबतदारी (रिश्तेदारी व अहले बैत) की मुहब्बत के सिवा कोई बदला नहीं मांगता [74] [75]; और जो कोई नेकी कमाए, हम उसके लिए उसमें और भलाई बढ़ा देते हैं [76]; बेशक अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, क़द्रदान है।

[73] रसूल का काम अल्लाह का काम

ख़ुशख़बरी हुज़ूर ﷺ सुना रहे हैं मगर अल्लाह फ़रमाता है कि 'हम बशारत देते हैं'। इससे साबित हुआ कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की ज़बान-ए-पाक से निकली हर बात अल्लाह का फ़रमान है।

[74] शान-ए-नुज़ूल: अंसार-ए-किराम का हदिया

जब अंसार-ए-किराम ने हुज़ूर ﷺ की ख़िदमत में माल पेश करना चाहा कि आपकी तंगदस्ती दूर हो, तो यह आयत नाज़िल हुई कि नबी को दुनियावी माल की हाजत नहीं। हुज़ूर ﷺ ने उनका माल वापस फ़रमा दिया।

[75] अहले बैत-ए-अतहार की मुहब्बत की फ़र्ज़ियत

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से मरवी है कि जब यह आयत नाज़िल हुई तो सहाबा ने अर्ज़ किया: 'या रसूलल्लाह! आपके वे क़राबतदार कौन हैं जिनकी मुहब्बत हम पर फ़र्ज़ की गई?' हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: 'अली, फ़ातिमा और उनके दोनों बेटे (हसन व हुसैन)।' अहले बैत-ए-किराम की मुहब्बत ईमान का लाज़मी जुज़ है।

[76] अहले बैत से मुहब्बत पर नेकियों की बढ़ोतरी

तफ़सीर ख़ज़ाइनुल इरफ़ान में है कि नेकी कमाने से मुराद अहले बैत-ए-अतहार से मुहब्बत और उनकी ताज़ीम है। जो यह नेकी कमाता है, अल्लाह तआला उसके आमाल में नूर और दर्जात में बेइंतिहा इज़ाफ़ा फ़रमाता है।

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