Transliteration: (Am lahum shurakaaa'u shara'oo lahum minad deeni maa lam ya'zan bihil laah; wa law laa kalimatul fasli laqudiya bainahum; wa innaz zaalimeena lahum 'azaabun aleem)
कà¥à¤¯à¤¾ उनके à¤à¤¸à¥‡ शरीक हैं जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उनके लिठदीन का à¤à¤¸à¤¾ तरीक़ा मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° कर दिया है जिसकी अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ ने इजाज़त नहीं दी [65]? और अगर फ़ैसले का फ़रमान पहले से तय न होता [66], तो उनके दरमियान फ़ैसला कर दिया गया होता; और बेशक ज़ालिमों के लिठदरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• अज़ाब है [67]!
मà¥à¤¶à¤°à¤¿à¤•़ीन ने अपने सरदारों और शैतानों के कहने पर शिरà¥à¤•, हराम चीज़ों को हलाल और हलाल को हराम ठहराने के बातिल तरीक़े गढ़ लिठथे जिनकी अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ ने कोई सनद नाज़िल नहीं फ़रमाई।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला का यह अदà¥à¤² है कि मà¥à¤•मà¥à¤®à¤² जज़ा व सज़ा के लिठक़यामत का दिन मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° है, वरना उनकी इस सरकशी पर दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ ही में उन पर अज़ाब आ जाता।
ज़ालिमों यानी काफ़िरों के लिठजहनà¥à¤¨à¤® की दायमी सज़ा मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° है जिससे वे कà¤à¥€ न निकल सकेंगे।
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