कुरान - 42:20 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
مَن كَانَ يُرِيدُ حَرۡثَ ٱلۡأٓخِرَةِ نَزِدۡ لَهُۥ فِي حَرۡثِهِۦۖ وَمَن كَانَ يُرِيدُ حَرۡثَ ٱلدُّنۡيَا نُؤۡتِهِۦ مِنۡهَا وَمَا لَهُۥ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ مِن نَّصِيبٍ

Transliteration: (Man kaana yureedu harsal Aakhirati nazid lahoo fee harsihee wa man kaana yureedu harsad dunyaa nu'tihee minhaa wa maa lahoo fil Aakhirati min naseeb)

जो शख़्स आख़िरत की खेती चाहता है [60], हम उसकी खेती में इज़ाफ़ा (बढ़ोतरी) फ़रमाते हैं [61]; और जो शख़्स दुनिया की खेती चाहता है [62], हम उसे उसमें से कुछ दे देते हैं [63] और आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं होता [64]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 20

जो शख़्स आख़िरत की खेती चाहता है [60], हम उसकी खेती में इज़ाफ़ा (बढ़ोतरी) फ़रमाते हैं [61]; और जो शख़्स दुनिया की खेती चाहता है [62], हम उसे उसमें से कुछ दे देते हैं [63] और आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं होता [64]!

[60] आख़िरत की खेती: रज़ा-ए-इलाही की नीयत

जो बंदा अपने हर नेक अमल (नमाज़, रोज़ा, सदक़ा) से अल्लाह और उसके रसूल की रज़ा और आख़िरत की कामियाबी तलब करता है और दिखावे से पाक रहता है, वह आख़िरत का काश्तकार है।

[61] नेकियों में इज़ाफ़ा और तौफ़ीक़

अल्लाह तआला उसकी नेकियों में बरकत अता फ़रमाता है, एक नेकी का सवाब दस से सात सौ गुना तक बढ़ाता है और उसे मज़ीद नेक आमाल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाता है।

[62] दुनिया की खेती: रियाकारी और शोहरत

जो शख़्स सिर्फ़ दुनिया की दौलत, शोहरत या ओहदा पाने के लिए दीन के काम करता है, उसका मक़सद फ़ानी दुनिया है।

[63] तक़दीर के मुताबिक़ दुनियावी हिस्सा

उसे दुनिया में सिर्फ़ उतना ही मिलता है जितना उसकी तक़दीर में लिखा है, उससे एक ज़र्रा ज़्यादा नहीं मिल सकता।

[64] आख़िरत के अज्र से मुकम्मल महरूमी

चूँकि उसने आख़िरत के लिए कुछ कमाया ही नहीं था, लिहाज़ा वहां उसका कोई सवाब और हिस्सा नहीं होगा। रियाकारी से अमल बातिल हो जाता है।

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