Transliteration: (Man kaana yureedu harsal Aakhirati nazid lahoo fee harsihee wa man kaana yureedu harsad dunyaa nu'tihee minhaa wa maa lahoo fil Aakhirati min naseeb)
जो शख़à¥à¤¸ आख़िरत की खेती चाहता है [60], हम उसकी खेती में इज़ाफ़ा (बढ़ोतरी) फ़रमाते हैं [61]; और जो शख़à¥à¤¸ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की खेती चाहता है [62], हम उसे उसमें से कà¥à¤› दे देते हैं [63] और आख़िरत में उसका कोई हिसà¥à¤¸à¤¾ नहीं होता [64]!
जो बंदा अपने हर नेक अमल (नमाज़, रोज़ा, सदक़ा) से अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ और उसके रसूल की रज़ा और आख़िरत की कामियाबी तलब करता है और दिखावे से पाक रहता है, वह आख़िरत का काशà¥à¤¤à¤•ार है।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला उसकी नेकियों में बरकत अता फ़रमाता है, à¤à¤• नेकी का सवाब दस से सात सौ गà¥à¤¨à¤¾ तक बढ़ाता है और उसे मज़ीद नेक आमाल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाता है।
जो शख़à¥à¤¸ सिरà¥à¤«à¤¼ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की दौलत, शोहरत या ओहदा पाने के लिठदीन के काम करता है, उसका मक़सद फ़ानी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ है।
उसे दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में सिरà¥à¤«à¤¼ उतना ही मिलता है जितना उसकी तक़दीर में लिखा है, उससे à¤à¤• ज़रà¥à¤°à¤¾ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नहीं मिल सकता।
चूà¤à¤•ि उसने आख़िरत के लिठकà¥à¤› कमाया ही नहीं था, लिहाज़ा वहां उसका कोई सवाब और हिसà¥à¤¸à¤¾ नहीं होगा। रियाकारी से अमल बातिल हो जाता है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat