Transliteration: (Allahu lateefum bi'ibaadihee yarzuqu mai yashaaa'u wa Huwal Qawiyyul 'Azeez (Section 2))
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ अपने बंदों पर बड़ा लà¥à¤¤à¥à¤«à¤¼ फ़रमाने वाला (मेहरबान) है [58]; वह जिसे चाहता है रिज़à¥à¤•़ अता फ़रमाता है [59]; और वही बड़ी क़ूवत वाला, सब पर ग़ालिब है।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला 'लतीफ़' है, उसके à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¨à¤¾à¤¤ इतने बारीक और बेपायां हैं कि इंसान के जिसà¥à¤® के हर बाल पर हज़ारों नेअमतें हैं। बंदा नाफ़रमानियां करता है मगर वह उसका रिज़à¥à¤•़ बंद नहीं फ़रमाता।
ज़ाहिरी रिज़à¥à¤•़ (माल व दौलत) वह अपनी हिकमत से काफ़िर व मोमिन सबको देता है; और बातिनी रिज़à¥à¤•़ यानी ईमान, तक़à¥à¤µà¤¾, मारिफ़त और विलायत अपने ख़ास बंदों को अता फ़रमाता है। अबू जहल अपनी अक़à¥à¤²à¤®à¤‚दी के बावजूद ईमान से महरूम रहा और हज़रत बिलाल हबà¥à¤¶à¥€ रज़ियलà¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अनà¥à¤¹à¥ ईमान की दौलत पाकर मोमिनों के सरदार बन गà¤à¥¤
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