कुरान - 42:19 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
ٱللَّهُ لَطِيفُۢ بِعِبَادِهِۦ يَرۡزُقُ مَن يَشَآءُۖ وَهُوَ ٱلۡقَوِيُّ ٱلۡعَزِيزُ

Transliteration: (Allahu lateefum bi'ibaadihee yarzuqu mai yashaaa'u wa Huwal Qawiyyul 'Azeez (Section 2))

अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा लुत्फ़ फ़रमाने वाला (मेहरबान) है [58]; वह जिसे चाहता है रिज़्क़ अता फ़रमाता है [59]; और वही बड़ी क़ूवत वाला, सब पर ग़ालिब है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 19

अल्लाह अपने बंदों पर बड़ा लुत्फ़ फ़रमाने वाला (मेहरबान) है [58]; वह जिसे चाहता है रिज़्क़ अता फ़रमाता है [59]; और वही बड़ी क़ूवत वाला, सब पर ग़ालिब है।

[58] लुत्फ़-ए-इलाही की वुसअत

अल्लाह तआला 'लतीफ़' है, उसके एहसानात इतने बारीक और बेपायां हैं कि इंसान के जिस्म के हर बाल पर हज़ारों नेअमतें हैं। बंदा नाफ़रमानियां करता है मगर वह उसका रिज़्क़ बंद नहीं फ़रमाता।

[59] ज़ाहिरी और रूहानी रिज़्क़ की तक़सीम

ज़ाहिरी रिज़्क़ (माल व दौलत) वह अपनी हिकमत से काफ़िर व मोमिन सबको देता है; और बातिनी रिज़्क़ यानी ईमान, तक़्वा, मारिफ़त और विलायत अपने ख़ास बंदों को अता फ़रमाता है। अबू जहल अपनी अक़्लमंदी के बावजूद ईमान से महरूम रहा और हज़रत बिलाल हब्शी रज़ियल्लाहु अन्हु ईमान की दौलत पाकर मोमिनों के सरदार बन गए।

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