कुरान - 42:18 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
يَسۡتَعۡجِلُ بِهَا ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِهَاۖ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مُشۡفِقُونَ مِنۡهَا وَيَعۡلَمُونَ أَنَّهَا ٱلۡحَقُّۗ أَلَآ إِنَّ ٱلَّذِينَ يُمَارُونَ فِي ٱلسَّاعَةِ لَفِي ضَلَٰلِۭ بَعِيدٍ

Transliteration: (Yasta'jilu bihal lazeena laa yu'minoona bihaa wallazeena aamanoo mushfiqoona minhaa wa ya'lamoona annahal haqq; alaaa innal lazeena yumaaroona fis Saa'ati lafee dalaalin ba'eed)

वे लोग जो इस (क़ियामत) पर ईमान नहीं रखते, इसके लिए जल्दी मचाते हैं [54]; और जो लोग ईमान रखते हैं, वे इससे डरते हैं [55] और जानते हैं कि बेशक यह हक़ है [56]; ख़बरदार! बेशक जो लोग क़ियामत के बारे में शक करते हैं वे दूर की गुमराही में पड़े हैं [57]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 18

वे लोग जो इस (क़ियामत) पर ईमान नहीं रखते, इसके लिए जल्दी मचाते हैं [54]; और जो लोग ईमान रखते हैं, वे इससे डरते हैं [55] और जानते हैं कि बेशक यह हक़ है [56]; ख़बरदार! बेशक जो लोग क़ियामत के बारे में शक करते हैं वे दूर की गुमराही में पड़े हैं [57]!

[54] मुनकिरीन का मज़ाक़ के तौर पर जल्दी मचाना

काफ़िर क़ियामत पर यक़ीन नहीं रखते थे, इसलिए मज़ाक़ उड़ाते हुए कहते थे कि अगर क़ियामत आनी है तो ले आओ!

[55] मोमिनीन का ख़ौफ़-ए-ख़ुदा

सच्चे मोमिन जानते हैं कि क़ियामत में हिसाब-किताब होगा, इसलिए वे अपनी नेकियों के बावजूद रब की बारगाह में लरज़ां व तरसां रहते हैं।

[56] सादिक़ मसदूक़ ﷺ की ख़बर पर यक़ीन

मोमिनों का यक़ीन इसलिए कामिल है क्योंकि इसकी ख़बर उस सादिक़ व अमीन नबी ﷺ ने दी है जिसकी ज़बान से कभी हक़ के सिवा कुछ नहीं निकला।

[57] क़ियामत के मुनकिर दूर की गुमराही में

क़ियामत का इन्कार इंसान से हर ख़ौफ़ छीन लेता है जिससे वह बदअमलियों की अंधी खाई में गिर जाता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now