Transliteration: (Wa maa tafarraqooo illaa mim ba'di maa jaaa'ahumul 'ilmu baghyam bainahum; wa law laa Kalimatun sabaqat mir Rabbika ilaaa ajalim musammal laqudiya bainahum; wa innal lazeena oorisul Kitaaba mim ba'dihim lafee shakkim minhu mureeb)
और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने फूट नहीं डाली मगर इसके बाद कि उनके पास इलà¥à¤® आ चà¥à¤•ा था [36], आपस की ज़िद और सरकशी की वजह से [37]; और अगर आपके रब की तरफ़ से à¤à¤• बात à¤à¤• मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤°à¤¾ मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¤ तक के लिठपहले तय न हो चà¥à¤•ी होती, तो उनके दरमियान फ़ैसला कर दिया गया होता [38]; और बेशक जो लोग उनके बाद किताब के वारिस बनाठगà¤, वे इसके बारे में सख़à¥à¤¤ बेचैन करने वाले शक में पड़े हà¥à¤ हैं [39]।
अहले किताब के दरमियान इख़à¥à¤¤à¤¿à¤²à¤¾à¤«à¤¼à¤¾à¤¤ और फूट किसी बेख़बरी या जहालत की वजह से नहीं हà¥à¤, बलà¥à¤•ि हक़ का इलà¥à¤® आ जाने के बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सिरà¥à¤«à¤¼ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¥€ मफ़ादात, रियासत और अना की ख़ातिर तफ़रक़ा पैदा किया।
आपस का हसद और सरकशी ही इंसान को हक़ क़बूल करने से रोकती है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने नबियों की तालीमात को छोड़ कर अपनी राय को तरजीह दी।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला ने फ़ैसले और मà¥à¤•मà¥à¤®à¤² जज़ा व सज़ा के लिठक़यामत का दिन मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° फ़रमा रखा है। अगर यह तफ़à¥à¤¸à¥€à¤²à¥€ मोहलà¥à¤²à¤¤ मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° न होती तो दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ ही में उन पर फ़ैसला कà¥à¤¨ अज़ाब आ जाता।
अहले किताब के बाद जो नसà¥à¤²à¥‡à¤‚ आईं, वे अपने बà¥à¤œà¤¼à¥à¤°à¥à¤—ों के इख़à¥à¤¤à¤¿à¤²à¤¾à¤«à¤¼à¤¾à¤¤ और तहरीफ़ात की वजह से हक़ीक़त से दूर होकर मà¥à¤¸à¤²à¤¸à¤² शक व तरदà¥à¤¦à¥à¤¦ में मà¥à¤¬à¥à¤¤à¤¿à¤²à¤¾ रहीं।
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