कुरान - 42:14 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
وَمَا تَفَرَّقُوٓاْ إِلَّا مِنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَهُمُ ٱلۡعِلۡمُ بَغۡيَۢا بَيۡنَهُمۡۚ وَلَوۡلَا كَلِمَةٞ سَبَقَتۡ مِن رَّبِّكَ إِلَىٰٓ أَجَلٖ مُّسَمّٗى لَّقُضِيَ بَيۡنَهُمۡۚ وَإِنَّ ٱلَّذِينَ أُورِثُواْ ٱلۡكِتَٰبَ مِنۢ بَعۡدِهِمۡ لَفِي شَكّٖ مِّنۡهُ مُرِيبٖ

Transliteration: (Wa maa tafarraqooo illaa mim ba'di maa jaaa'ahumul 'ilmu baghyam bainahum; wa law laa Kalimatun sabaqat mir Rabbika ilaaa ajalim musammal laqudiya bainahum; wa innal lazeena oorisul Kitaaba mim ba'dihim lafee shakkim minhu mureeb)

और उन्होंने फूट नहीं डाली मगर इसके बाद कि उनके पास इल्म आ चुका था [36], आपस की ज़िद और सरकशी की वजह से [37]; और अगर आपके रब की तरफ़ से एक बात एक मुक़र्ररा मुद्दत तक के लिए पहले तय न हो चुकी होती, तो उनके दरमियान फ़ैसला कर दिया गया होता [38]; और बेशक जो लोग उनके बाद किताब के वारिस बनाए गए, वे इसके बारे में सख़्त बेचैन करने वाले शक में पड़े हुए हैं [39]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 14

और उन्होंने फूट नहीं डाली मगर इसके बाद कि उनके पास इल्म आ चुका था [36], आपस की ज़िद और सरकशी की वजह से [37]; और अगर आपके रब की तरफ़ से एक बात एक मुक़र्ररा मुद्दत तक के लिए पहले तय न हो चुकी होती, तो उनके दरमियान फ़ैसला कर दिया गया होता [38]; और बेशक जो लोग उनके बाद किताब के वारिस बनाए गए, वे इसके बारे में सख़्त बेचैन करने वाले शक में पड़े हुए हैं [39]।

[36] इल्म के बावजूद हठधर्मी और फूट

अहले किताब के दरमियान इख़्तिलाफ़ात और फूट किसी बेख़बरी या जहालत की वजह से नहीं हुए, बल्कि हक़ का इल्म आ जाने के बाद उन्होंने सिर्फ़ दुनियावी मफ़ादात, रियासत और अना की ख़ातिर तफ़रक़ा पैदा किया।

[37] हसद और बग़ावत का नतीजा

आपस का हसद और सरकशी ही इंसान को हक़ क़बूल करने से रोकती है। उन्होंने नबियों की तालीमात को छोड़ कर अपनी राय को तरजीह दी।

[38] यौम-ए-क़यामत तक की मोहल्लत

अल्लाह तआला ने फ़ैसले और मुकम्मल जज़ा व सज़ा के लिए क़यामत का दिन मुक़र्रर फ़रमा रखा है। अगर यह तफ़्सीली मोहल्लत मुक़र्रर न होती तो दुनिया ही में उन पर फ़ैसला कुन अज़ाब आ जाता।

[39] पिछली और अगली नस्लों का बेचैन शक

अहले किताब के बाद जो नस्लें आईं, वे अपने बुज़ुर्गों के इख़्तिलाफ़ात और तहरीफ़ात की वजह से हक़ीक़त से दूर होकर मुसलसल शक व तरद्दुद में मुब्तिला रहीं।

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