कुरान - 42:9 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
أَمِ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ أَوۡلِيَآءَۖ فَٱللَّهُ هُوَ ٱلۡوَلِيُّ وَهُوَ يُحۡيِ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

Transliteration: (Amit takhazoo min dooniheee awliyaaa'a fallaahu Huwal Waliyyu wa Huwa yuhyil mawtaa wa Huwa 'alaa kulli shai'in Qadeer (section 1))

क्या उन्होंने अल्लाह को छोड़कर दूसरों को कारसाज़ बना लिया है [16]? पस अल्लाह ही हक़ीक़ी कारसाज़ है [17], और वही मुर्दों को ज़िंदा फ़रमाता है [18], और वह हर चीज़ पर क़ादिर है [19]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 9

क्या उन्होंने अल्लाह को छोड़कर दूसरों को कारसाज़ बना लिया है [16]? पस अल्लाह ही हक़ीक़ी कारसाज़ है [17], और वही मुर्दों को ज़िंदा फ़रमाता है [18], और वह हर चीज़ पर क़ादिर है [19]!

[16] ग़ैर-ख़ुदा को माबूद बनाने की नादानी

मुशरिक़ीन ने बेबस बुतों को अपना सहारा समझा जो न नफ़ा दे सकते हैं न नुक़सान। यह उनकी अक़्ल का दिवालियापन था।

[17] हक़ीक़ी वली व कारसाज़ सिर्फ़ अल्लाह

हक़ीक़ी वली, मददगार और निगहबान सिर्फ़ अल्लाह तआला की ज़ात-ए-अक़्दस है। उसी पर भरोसा करना और उसी के एहकाम की पैरवी करना कामियाबी की ज़मानत है।

[18] मुर्दों को ज़िंदा करने पर क़ादिर

वही ज़ात है जो बेजान ख़ाक में रूह फूंक कर इंसान बनाती है और क़यामत के दिन बोसीदा हड्डियों को दोबारा ज़िंदा फ़रमाएगी।

[19] क़ुदरत-ए-कामिला

उसकी क़ुदरत हर मुमकिन चीज़ पर मुहीत है; कोई काम उसके लिए मुश्किल या नामुमकिन नहीं।

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