कुरान - 42:7 सूरह अश-शूरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَكَذَٰلِكَ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ قُرۡءَانًا عَرَبِيّٗا لِّتُنذِرَ أُمَّ ٱلۡقُرَىٰ وَمَنۡ حَوۡلَهَا وَتُنذِرَ يَوۡمَ ٱلۡجَمۡعِ لَا رَيۡبَ فِيهِۚ فَرِيقٞ فِي ٱلۡجَنَّةِ وَفَرِيقٞ فِي ٱلسَّعِيرِ

Transliteration: (Wa kazaalika awhainaaa llaika Qur-aanan 'Arabiyyal litunzira Ummal Quraa wa man hawlahaa wa tunzira Yawmal Jam'i laa raiba feeh; fareequn fil jannati wa fareequn fissa'eer)

और इसी तरह हमने आपकी तरफ़ अरबी क़ुरआन की वही फ़रमाई ताकि आप बस्तियों के मरकज़ (मक्का वालों) को और जो लोग उसके इर्द-गिर्द हैं उन्हें डराएं [11]; और आप उन्हें जमा होने के दिन (क़ियामत) से डराएं जिसमें कोई शक नहीं [12]; एक गिरोह जन्नत में होगा और एक गिरोह दहकती आग (दोज़ख़) में होगा [13]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शूरा आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अश्-शूरा तफ़सीर - आयत 7

और इसी तरह हमने आपकी तरफ़ अरबी क़ुरआन की वही फ़रमाई ताकि आप बस्तियों के मरकज़ (मक्का वालों) को और जो लोग उसके इर्द-गिर्द हैं उन्हें डराएं [11]; और आप उन्हें जमा होने के दिन (क़ियामत) से डराएं जिसमें कोई शक नहीं [12]; एक गिरोह जन्नत में होगा और एक गिरोह दहकती आग (दोज़ख़) में होगा [13]!

[11] उम्मुल क़ुरा यानी मक्का मुअज़्ज़मा और आलमी तब्लीग़

मक्का मुअज़्ज़मा तमाम बस्तियों की मां और मरकज़ है। हुज़ूर ﷺ अरबी नस्ल से मक्का में जलवागर हुए, लिहाज़ा क़ुरआन अरबी में नाज़िल हुआ। मक्का से दावत शुरू होकर पूरी दुनिया के लिए आम हुई जैसा कि फ़रमाया गया: "ताकि आप सारे जहानों के लिए डर सुनाने वाले हों।"

[12] यक़ीनी यौमुल जम्अ (क़ियामत) की चेतावनी

क़ियामत के आने में ज़र्रा बराबर शक नहीं। उस दिन तमाम अगले और पिछले इंसान, जिन्नात और मख़्लूक़ात हिसाब-किताब के लिए एक मैदान में इकट्ठा किए जाएंगे।

[13] यौमुल फ़स्ल: जन्नत और दोज़ख़ के दो गिरोह

हश्र के बाद फ़ैसला होगा और दो गिरोह बन जाएंगे: नेककार मोमिनीन जन्नत में हमेशा की राहतें पाएंगे, और मुशरिक़ीन व काफ़िर दहकती हुई आग में अज़ाब भुगतेंगे।

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