कुरान - 81:19 सूरह अत-तक्वीर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
إِنَّهُۥ لَقَوۡلُ رَسُولٖ كَرِيمٖ

Transliteration: (Innahoo laqawlu rasoolin kareem)

19. निश्चित रूप से यह एक उच्चतम [14] पैग़म्बर द्वारा कहा गया वचन है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तक्वीर आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

 पैगंबर की तिलावत (The Recitation of the Noble Messenger)

"बिलकुल यह तिलावत है मुबारक पैगंबर की" (Surah Al-Takweer: 19)

1. यह आयत क़ुरआन की तिलावत के बारे में है (This verse emphasizes the recitation of the Quran)

यह आयत इस बात पर जोर देती है कि क़ुरआन पहले की किताबों की तरह लिखित रूप में नहीं उतरा, जैसे कि इंजील और तौरा। बल्कि, क़ुरआन तिलावत के रूप में प्रकट हुआ। हज़रत जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) पवित्र नबी ﷺ के पास आए और उन्हें आयतें सुनाईं। इसलिए क़ुरआन को "तिलावती किताब" कहा जाता है — यह एक तिलावत के रूप में प्रकट हुआ था, न कि केवल एक लिखित ग्रंथ के रूप में।

2. हज़रत जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) और पवित्र नबी ﷺ के बीच का अंतर (Distinction between Hazrat Jibraeel (peace be upon him) and the Holy Prophet ﷺ)

यह बात उल्लेखनीय है कि हज़रत जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) ने सबसे पहले क़ुरआन की तिलावत की, और पवित्र नबी ﷺ ने सबसे पहले उस पर अमल किया। क़ुरआन अल्लाह तआला का काम है, जो हज़रत जिब्राईल के जरिए पवित्र नबी ﷺ तक पहुँचाया गया और फिर नबी ﷺ और उनके अनुयायियों ने उस पर अमल किया।

यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं जो हज़रत जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) और पवित्र नबी ﷺ के कार्यों के बीच अंतर को स्पष्ट करते हैं:

हज़रत जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) का कार्य (Role of Hazrat Jibraeel (peace be upon him)): हज़रत जिब्राईल विशेष रूप से पैगंबरों के लिए भेजे गए दूत थे। उनका कार्य था अल्लाह का संदेश पैगंबरों तक पहुँचाना।

पवित्र नबी ﷺ का कार्य (Role of the Holy Prophet ﷺ): पवित्र नबी ﷺ अंतिम पैगंबर थे, जो समग्र मानवता के लिए भेजे गए थे। उनका संदेश केवल पैगंबरों के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के लिए था।

हज़रत जिब्राईल का मिशन का अंत (End of Hazrat Jibraeel's Mission): हज़रत जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) का मिशन पवित्र नबी ﷺ के निधन के साथ समाप्त हो गया, क्योंकि अब कोई और पैगंबर नहीं था, जिसे जिब्राईल संदेश पहुँचाते।

अधिकार (Authority): पवित्र नबी ﷺ पूर्ण अधिकार के साथ एक पैगंबर थे, जबकि हज़रत जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) बिना किसी अधिकार के संदेशवाहक थे, जैसे एक डाकिया या दूत। इसलिए, जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) पवित्र नबी ﷺ के अनुयायी थे और उनके खिलाफ नहीं थे।

यह अंतर हज़रत जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) और पवित्र नबी ﷺ की विशेष, अल्लाह द्वारा निर्धारित भूमिकाओं को उजागर करता है, जिसमें पवित्र नबी ﷺ अंतिम और सबसे प्रामाणिक पैगंबर थे।

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