कुरान - 81:18 सूरह अत-तक्वीर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
وَٱلصُّبۡحِ إِذَا تَنَفَّسَ

Transliteration: (Wassubhi izaa tanaffas)

18. और सुबह की क़स्म जब वह सांस लेती है [13]. (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अत-तक्वीर आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

क़ियामत के दिन सुबह और रात की अहमियत (The Significance of the Morning and Night on the Day of Judgment)

"और सुबह की जब वह साँस लेता है।" (Surah Al-Takweer: 18)

1. अल्लाह के प्यारे बंदों से जुड़ा समय की पवित्रता (The Sacredness of Times Linked to Allah's Beloved Servants)

यह आयत रात के आखिरी हिस्से और सुबह का जिक्र करती है, जो या तो हर रात या फिर दिन निकलने का समय हो सकता है। यह वह समय होते हैं जब रोने, इबादत करने और अपने रब से मांगने के लिए उपयुक्त होते हैं, और ये समय अल्लाह तआला के प्यारे बंदों से जुड़े होते हैं। उनका रोना और इबादत अल्लाह के पास प्रिय होती है। इसलिए, जो समय और स्थान उनके प्यारे बंदों से जुड़ते हैं, वे भी प्रिय हो जाते हैं।

पवित्र स्थान (Sacred Places): पवित्र मक्का, सफा और मरवा की पहाड़ियों, और मक़ामे इब्राहीम को अल्लाह के प्यारे बंदों से जुड़ने के कारण अति प्रिय स्थान माना जाता है।

महत्वपूर्ण घटनाएँ (Significant Events): "रात" मीराज की रात को और "सुबह" हज़रत मुहम्मद ﷺ की पैदाइश को संदर्भित कर सकती है, क्योंकि ये वे महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं जो इन समयों से जुड़ी हुई हैं।

विशेष तिथियाँ (Special Dates): राजाब की 27वीं रात और रबी अल-आव्वल की 12वीं तारीख विशेष महत्व रखती हैं, क्योंकि इन तिथियों पर महत्वपूर्ण घटनाएँ घटीं। इसी तरह, क़द्र की रात और रमजान का महीना भी अत्यधिक सम्मानित हैं।

2. रात और दिन का प्रतीकात्मक अर्थ रूह के संदर्भ में (The Symbolism of Night and Day in Relation to the Soul)

यह आयत रूह से जुड़ी एक और तफ्सीर पेश करती है: रात की प्रतीकात्मकता लापरवाही या इन्कार को दर्शाती है, जबकि दिन की प्रतीकात्मकता जागरूकता, मार्गदर्शन और इबादत को दर्शाती है। दिन वह अवस्था दर्शाता है जब कोई अल्लाह के आदेशों के अनुसार चलता है, जबकि रात वह अवस्था है जब इन आदेशों की उपेक्षा की जाती है।

रात (Night): लापरवाही, इन्कार, या अल्लाह के आदेशों के प्रति नाफरमानी का प्रतीक है।
दिन (Day): जागरूकता, मार्गदर्शन, और अल्लाह की इबादत का प्रतीक है।

यह विपरीतताएँ अल्लाह की पूर्ण शक्ति को दर्शाती हैं, और इन समयों और स्थितियों पर क़समें खाने का आदेश दिया गया है।

3. आयत का वैज्ञानिक दृष्टिकोण: "साँस लेते सुबह" (Scientific Perspective on the Verse: "Breathing Morning")

"जब वह साँस लेने लगे" वाक्यांश को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखना दिलचस्प है। कुछ वैज्ञानिकों और उलमा ने इस रूपक को रात से दिन की ओर बदलाव के रूप में व्याख्यायित किया है - वह समय जब पृथ्वी "जागती है" और दिन के समय में प्रवेश करती है, जो जीवन को सहारा देता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से:

पृथ्वी का जैविक चक्र (The Earth's Biological Cycle): जैसे पृथ्वी रात से दिन की ओर बढ़ती है, इसे उसी प्रकार समझा जा सकता है जैसे जैविक जीवों को दिन-रात के चक्र पर निर्भरता होती है। कई जीवों, जिनमें इंसान भी शामिल हैं, को सर्केडियन रिदम (circadian rhythms) का अनुभव होता है, जो नींद, जागरण, और शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करता है, जो इस आयत के रूपक "साँस लेने" या सुबह के साथ जागने के अनुरूप है।

वायुमंडलीय परिवर्तन (Atmospheric Changes): सुबह के समय वातावरण में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं, खासकर जब सूरज उगता है। तापमान बढ़ता है, और हवा में गतिशीलता शुरू होती है, जिससे हवा के पैटर्न और मौसम की स्थिति में बदलाव आता है। इसे प्रतीकात्मक रूप से "साँस लेना" कहा जा सकता है, जैसा कि सुबह के आगमन के साथ प्रकृति जीवित हो उठती है।

फोटोसिंथेसिस और जीवन (Photosynthesis and Life): सुबह की रोशनी फोटोसिंथेसिस को सक्रिय करती है, जो वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पौधे प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं, जो पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है। "साँस लेने" का यह रूपक सुबह के समय शुरू होने वाली उन महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को दर्शाता है, जैसे कि सूर्य के प्रकाश से पृथ्वी का जीवन फिर से सक्रिय हो जाता है, ठीक वैसे जैसे साँस लेना जीवन के लिए आवश्यक है।

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