Transliteration: (Afa anta tusmi'us summa aw tahdil 'umya wa man kaana fee dalaalin mubeen)
"तो क्या आप बहरों को सुना सकते हैं, या अंधों को राह दिखा सकते हैं [69] और उन्हें जो खुली गुमराही में हैं [70]?"
यहाँ "बहरे" और "अंधे" के अलफ़ाज़ उन लोगों के लिए हैं जो बातिनी और रूहानी तौर पर हक़ से पूरी तरह कट चुके हैं। अगरचे वे ज़ाहिरी तौर पर देखते और सुनते हैं, लेकिन वे रूहानी तौर पर बे-हिस हैं—जो न इलाही हिदायत को पहचान सकते हैं और न क़ुरआन व नबी ﷺ की सच्चाई को क़बूल कर सकते हैं। यह रूहानी बे-हिसी उन्हें सच्ची समझ से महरूम कर देती है।
ये लोग सिर्फ़ भटके हुए ही नहीं हैं, बल्कि अपनी गुमराही में जान-बूझकर पूरी तरह जमे हुए हैं। यह कोई इत्तिफ़ाक़ी ग़लती नहीं बल्कि उनकी चुनी हुई हठधर्मी है जिससे वे पलटने से साफ़ इन्कार करते हैं।
उनकी हालत समंदर में तैरने वाले जहाज़ की तरह है जो किनारे पर वापस आ सकता है; लेकिन अगर समंदर ख़ुद जहाज़ के अंदर भर जाए तो फिर बचने का कोई रास्ता नहीं रहता—वह पूरी तरह डूब जाता है। ऐसी ही गहरी और ला-इलाज उनकी गुमराही है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat