कुरान - 43:41 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
فَإِمَّا نَذۡهَبَنَّ بِكَ فَإِنَّا مِنۡهُم مُّنتَقِمُونَ

Transliteration: (Fa immaa nazhabanna bika fa innaa minhum muntaqimoon)

तो अगर हम आपको (दुनिया से) उठा लें [70], तब भी हम उनसे बदला लेकर रहेंगे [71]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 41

"तो अगर हम आपको (दुनिया से) उठा लें [70], तब भी हम उनसे बदला लेकर रहेंगे [71];"

[70] वफ़ात-ए-नबवी के बाद भी इलाही निज़ाम

अल्लाह तआला अपने हबीब ﷺ को तसल्ली देते हुए इरशाद फ़रमाता है कि अगर आपके दुनियावी विसाल के बाद भी ये काफ़िर अपनी सरकशी पर क़ायम रहे, तो वे अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकते।

[71] इंतिक़ाम-ए-इलाही का यक़ीनी होना

अल्लाह का अज़ाब मुनकिरीन पर आकर रहेगा। चाहे हुज़ूर ﷺ की ज़ाहिरी हयात में बदर और फ़तह-ए-मक्का के ज़रिए हुआ, या बाद में उनकी नस्लों की हलाकत के ज़रिए—अल्लाह अपने रसूल के दुश्मनों से पूरा-पूरा इंतिक़ाम लेने पर क़ादिर है।

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