कुरान - 43:43 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
فَٱسۡتَمۡسِكۡ بِٱلَّذِيٓ أُوحِيَ إِلَيۡكَۖ إِنَّكَ عَلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ

Transliteration: (Fastamsik billazeee oohiya ilaika innaka 'alaa Siraatin Mustaqeem)

पस आप उस (किताब) को मज़बूती से थामे रहिए जो आपकी तरफ़ वही की गई है [74]; बेशक आप सीधे रास्ते (सिरात-ए-मुस्तक़ीम) पर हैं [75]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 43

"पस आप उस (किताब) को मज़बूती से थामे रहिए जो आपकी तरफ़ वही की गई है [74]; बेशक आप सीधे रास्ते (सिरात-ए-मुस्तक़ीम) पर हैं [75]!"

[74] वही-ए-इलाही (क़ुरआन) को मज़बूती से थामना

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को हुक्म फ़रमाया जा रहा है कि काफ़िरों की मुख़ालिफ़त और तअ़्नों की परवाह किए बग़ैर क़ुरआन-ए-पाक और अहकाम-ए-इलाही की तब्लीग़ पर पूरी क़ुव्वत के साथ साबित-क़दम रहें।

[75] सिरात-ए-मुस्तक़ीम की कामिल सनद

अल्लाह तआला ने ख़ुद गवाही दी कि ऐ हबीब! बेशक आप हक़ और सीधे रास्ते पर हैं। जो आपके दामन से वाबस्ता रहेगा वह हिदायत पाएगा, और जो आपसे अलग होगा वह हलाक हो जाएगा।

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