Transliteration: (Was'al man arsalnaa min qablika mir Rusulinaaa 'a ja'alnaa min doonir Rahmaani aalihatany yu'badoon (section 4))
"और आप हमारे उन रसूलों से पूछिए [78] जिन्हें हमने आपसे पहले भेजा था [79]: 'क्या हमने रहमान के सिवा भी ऐसे माबूद बनाए थे जिनकी इबादत की जाए [80]?'"
यह सवाल शब-ए-मेअ़राज बैतुल मुक़द्दस में तमाम अंबिया-ए-किराम की मौजूदगी में हुआ जहां हुज़ूर ﷺ ने तमाम नबियों की इमामत फ़रमाई। इससे नबियों की हयात और हुज़ूर ﷺ की सैय्यदुल-अंबिया वाली हैसियत साबित होती है।
हज़रत आदम से लेकर हज़रत ईसा अलैहिमुस्सलाम तक हर नबी ने सिर्फ़ एक अल्लाह की तौहीद की तब्लीग़ फ़रमाई।
किसी भी नबी की तालीम में शिर्क का कोई वुजूद नहीं था। मुशरिकीन का बुत-परस्ती करना उनकी अपनी मनघड़ंत जहालत है, जिसकी पिछली किसी शरीअत में कोई गुंजाइश नहीं थी।
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