कुरान - 43:45 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
وَسۡـَٔلۡ مَنۡ أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ مِن رُّسُلِنَآ أَجَعَلۡنَا مِن دُونِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ءَالِهَةٗ يُعۡبَدُونَ

Transliteration: (Was'al man arsalnaa min qablika mir Rusulinaaa 'a ja'alnaa min doonir Rahmaani aalihatany yu'badoon (section 4))

और आप हमारे उन रसूलों से पूछिए [78] जिन्हें हमने आपसे पहले भेजा था [79]: 'क्या हमने रहमान के सिवा भी ऐसे माबूद बनाए थे जिनकी इबादत की जाए [80]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 45

"और आप हमारे उन रसूलों से पूछिए [78] जिन्हें हमने आपसे पहले भेजा था [79]: 'क्या हमने रहमान के सिवा भी ऐसे माबूद बनाए थे जिनकी इबादत की जाए [80]?'"

[78] शब-ए-मेअ़राज अंबिया से मुलाक़ात और सवाल

यह सवाल शब-ए-मेअ़राज बैतुल मुक़द्दस में तमाम अंबिया-ए-किराम की मौजूदगी में हुआ जहां हुज़ूर ﷺ ने तमाम नबियों की इमामत फ़रमाई। इससे नबियों की हयात और हुज़ूर ﷺ की सैय्यदुल-अंबिया वाली हैसियत साबित होती है।

[79] तमाम अंबिया की यक-ज़बानी दावत

हज़रत आदम से लेकर हज़रत ईसा अलैहिमुस्सलाम तक हर नबी ने सिर्फ़ एक अल्लाह की तौहीद की तब्लीग़ फ़रमाई।

[80] शिर्क की मुकम्मल बे-बुनियादी

किसी भी नबी की तालीम में शिर्क का कोई वुजूद नहीं था। मुशरिकीन का बुत-परस्ती करना उनकी अपनी मनघड़ंत जहालत है, जिसकी पिछली किसी शरीअत में कोई गुंजाइश नहीं थी।

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