कुरान - 43:46 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا مُوسَىٰ بِـَٔايَٰتِنَآ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ فَقَالَ إِنِّي رَسُولُ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa laqad arsalnaa Moosaa bi aayaatinaaa ilaa Fir'awna wa mala'ihee faqaala innee Rasoolu Rabbil 'aalameen)

और यक़ीनन हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फ़िरऔन और उसके सरदारों की तरफ़ भेजा [81], तो उन्होंने कहा: 'बेशक मैं सारे जहानों के रब का रसूल हूं [82]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 46

"और यक़ीनन हमने मूसा को अपनी निशानियों के साथ फ़िरऔन और उसके सरदारों की तरफ़ भेजा [81], तो उन्होंने कहा: 'बेशक मैं सारे जहानों के रब का रसूल हूं [82]।'"

[81] हज़रत मूसा और फ़िरऔन का मुक़ाबला

यह आयत हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और फ़िरऔन के दरमियान तारीख़ी मुक़ाबले को बयान करती है, जो यह दिखाता है कि ज़ालिम और मुतकब्बिर हुक्मरान किस तरह हक़ के आगे अकड़ दिखाते हैं।

[82] मूसा अलैहिस्सलाम का वाज़ेह पैग़ाम

हज़रत मूसा ने साफ़ फ़रमाया कि वे रब्बुल आलमीन के भेजे हुए सच्चे रसूल हैं, और फ़िरऔन को अपनी झूठी खुदाई छोड़कर एक अल्लाह के आगे झुकने की दावत दी।

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