कुरान - 43:48 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
وَمَا نُرِيهِم مِّنۡ ءَايَةٍ إِلَّا هِيَ أَكۡبَرُ مِنۡ أُخۡتِهَاۖ وَأَخَذۡنَٰهُم بِٱلۡعَذَابِ لَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ

Transliteration: (Wa maa nureehim min aayatin illaa hiya akbaru min ukhtihaa wa akhaznaahum bil'azaabi la'allahum yarji'oon)

और हम उन्हें जो भी निशानी (अज़ाब) दिखाते थे [84], वह अपनी पहली (निशानी) से बढ़कर ही होती थी [85]; और हमने उन्हें अज़ाब में पकड़ लिया ताकि वे (नाफ़रमानी से) बाज़ आएं [86]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 48

"और हम उन्हें जो भी निशानी (अज़ाब) दिखाते थे [84], वह अपनी पहली (निशानी) से बढ़कर ही होती थी [85]; और हमने उन्हें अज़ाब में पकड़ लिया ताकि वे (नाफ़रमानी से) बाज़ आएं [86]!"

[84] मोजि़ज़ात की इलाही हैसियत

फ़िरऔन को दिखाए जाने वाले मोजि़ज़ात और निशानियां ख़ालिस अल्लाह की तरफ़ से थीं, जो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के दस्ते-मुबारक पर ज़ाहिर हुईं।

[85] निशानियों और मोजि़ज़ात की तरक़्क़ी

हर आने वाली निशानी पहली से ज़्यादा हैरतअंगेज़ और अज़ीम थी, ताकि फ़िरऔन की हठधर्मी पर हुज्जत पूरी हो सके।

[86] अज़ाब के ज़रिए तौबा की दावत

जब वे न माने, तो अल्लाह ने उन पर तूफ़ान, टिड्डियों, जुओं, मेंढकों और ख़ून के अज़ाब भेजे ताकि वे आजिज़ आकर तौबा करें और अल्लाह की तरफ़ रुजूअ लाएं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now