Transliteration: (Wa maa nureehim min aayatin illaa hiya akbaru min ukhtihaa wa akhaznaahum bil'azaabi la'allahum yarji'oon)
"और हम उन्हें जो भी निशानी (अज़ाब) दिखाते थे [84], वह अपनी पहली (निशानी) से बढ़कर ही होती थी [85]; और हमने उन्हें अज़ाब में पकड़ लिया ताकि वे (नाफ़रमानी से) बाज़ आएं [86]!"
फ़िरऔन को दिखाए जाने वाले मोजि़ज़ात और निशानियां ख़ालिस अल्लाह की तरफ़ से थीं, जो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के दस्ते-मुबारक पर ज़ाहिर हुईं।
हर आने वाली निशानी पहली से ज़्यादा हैरतअंगेज़ और अज़ीम थी, ताकि फ़िरऔन की हठधर्मी पर हुज्जत पूरी हो सके।
जब वे न माने, तो अल्लाह ने उन पर तूफ़ान, टिड्डियों, जुओं, मेंढकों और ख़ून के अज़ाब भेजे ताकि वे आजिज़ आकर तौबा करें और अल्लाह की तरफ़ रुजूअ लाएं।
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