कुरान - 43:49 सूरह अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
وَقَالُواْ يَـٰٓأَيُّهَ ٱلسَّاحِرُ ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ إِنَّنَا لَمُهۡتَدُونَ

Transliteration: (Wa qaaloo yaaa ayyuhas saahirud'u lanaa Rabbaka bimaa 'ahida 'indaka innanaa lamuhtadoon)

और वे कहने लगे: 'ऐ जादूगर [87]! हमारे लिए अपने रब से उस अहद के वसीले से दुआ कर जो उसने तुझसे कर रखा है [88], बेशक हम ज़रूर हिदायत पर आ जाएंगे!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़ुखरुफ आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ज़ुख़रुफ़ तफ़सीर - आयत 49

"और वे कहने लगे: 'ऐ जादूगर [87]! हमारे लिए अपने रब से उस अहद के वसीले से दुआ कर जो उसने तुझसे कर रखा है [88], बेशक हम ज़रूर हिदायत पर आ जाएंगे!'"

[87] उस ज़माने में 'जादूगर' का लफ़्ज़ ब-तौर-ए-इज़्ज़त

उस दौर में मिस्र के लोग बड़े आलिम और माहिर को इज़्ज़त के तौर पर 'साहिर' (जादूगर) कहते थे। अगरचे उन्होंने मूसा अलैहिस्सलाम को इस नाम से पुकारा, लेकिन उनका मक़सद उनकी क़ुव्वत और रुत्बे का एतिराफ़ करते हुए उनसे मदद मांगना था।

[88] वसीला और नबी की दुआ से मुसीबत का टलना

फ़िरऔनियों ने कहा कि अपने रब से उस अहद के वसीले से दुआ करो जो उसने तुमसे किया है (यानी दुआ क़बूल फ़रमाने का अहद)। इससे साबित हुआ:

  1. नेक बंदों की दुआ और वसीले से मदद तलब करना क़दीम तरीक़ा है—मुसीबत के वक़्त लोग अल्लाह के प्यारों ही की तरफ़ रुजूअ करते हैं।

  2. काफ़िर भी जानते थे कि नबी की दुआ से बलाएं टलती हैं, और यह अक़ीदा शिर्क नहीं है।

  3. जब काफ़िरों की मुसीबत नबी की दुआ से टल सकती है, तो मोमिनों पर नबी की शफ़ाअत और करम का क्या आलम होगा!

  4. बहरहाल, सिर्फ़ मुसीबत के वक़्त ज़बानी इक़रार करना और बाद में मुकर जाना ईमान नहीं बनता; ईमान दिल की सच्ची तसदीक़ का नाम है।

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